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यमराज भी नहीं छीन पाए जिंदगी, जानिए ऎसे ही लोगों के बारे में

आपने कई ऎसी खतरनाक दुर्घटनाओं के बारे में सुना होगा जिसमें किसी इंसान के बचने की उम्मीद नहीं होती, लेकन फिर भी एक न एक इंसान चमत्कारी ढंग से बच निकलता है। ये दुर्घटनाएं चाहे प्राकृतिक हो या मानवजनित, जिनमें सैंकड़ों से लेकर हजारों लोगों की मौतें हो जाती है, लेकिन उन्हीं में से कोई न कोई ऎसा इंसान भी सामने आ जाता है जिसें खरोंच तक नहीं आती। ऎसे में माना जाता है कि वह भाग्यशाली है, जो बच निकला। उस इंसान को भी मौत ने अपने शिकंजे में तो फंसाया था, लेकिन ऊपर वाला नहीं चाहता था कि वो मरे, सो बच गया। हम बता रहे हैं 10 ऎसे ही लोगों के बारे में जिससे आप जान सकते हैं कि मौत ऊपर वाले के चाहे बिना नहीं आ सकती चाहे कुछ भी हो जाए। तो जानिए….

रॉय सी सुलीवेन इस दुनिया में ऎसे इकलौते इंसान है जिन्होंने मौत को एक नहीं बल्कि सात बार मात दी। जी हां, सुलीवेन पर 1942 से लेकर 1977 के बीच में सात बार आकाशीय बिजली गिरी, लेकिन सातों बार ही उनका कुछ नहीं भी बिगड़ा। सुलीवेन के नाम सबसे ज्यादा बार बिजली गिरने वाले इंसान के रूप में वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौत तभी आ सकती है जब ऊपर वाला चाहे।

जहां इंसान की जहां 20 फुट की ऊंचाई से गिरने पर ही मौत हो सकती है वहीं वेस्ना ने 33000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान से गिरने पर भी मौत को मात दे दी। हवाई जहाज में फ्लाइट अटेंडेंट 22 वर्षीय वेस्ना का विमान 1972 में 33000 फुट की ऊंचाई पर ब्लास्ट हो गया था जिसमें सवार अन्य सभी लोगों की आकाश में ही मौत हो गई लेकिन वेस्ना धरती आ गिरी। इस दुर्घटना में उनके के दोनों पैर टूट गए, खाोपड़ी की हड्डी टूट गई, रीढ़ की हड्डी में तीन जगह फ्रे क्चर हो गया। उपचार के दौरान वेस्ना की कमरे के नीचे पूरे हिस्से पर लकवा मार गया लेकिन वो जिंदा बच गई। वेस्ना के नाम दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई वाले फ्रीफाल का रिकॉर्ड है।

इंसान के शरीर के किसी भी हिस्से में गोली लगने से ही मौत हो सकती है, लेकिन पाकिस्तान की मलाला के सिर में गोली लगने के बावजूद ऊपर वाले के चाहे बिना मौत उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। 2012 में स्कूल जा रही मलाला के सिर में तालिबानी आतंकियों ने गोली मार दी थी, लेकिन वो बच गई। मलाला लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल करने वाली एक मुस्लिम लड़की थी जिनकी यह बात तालिबानी आतंकियों को गंवारा नहीं थी जिसके चलते उन्होंने मलाला पर हमला किया।

ढ़ाका की एक फेक्ट्री में काम करने वाली रश्मा बेगम भी मौत को मात देने वाली महिलाओं में से एक है। राना प्लाजा नाम की बिल्डिंग में 19 वर्षीय रश्मा समेत हजारों लोग काम करते थे। एक दिन फेक्ट्री की बिल्डिंग गिर गई जिसमें दबकर 1100 लोगों की मौत हो गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 17 दिन बाद मलबा हटता गया तो उसमें से रश्मा बेगम जिंदा निकली जिसे देखकर लोग चौंक गए।

सल्वाडोर जनवरी 2014 मार्शल आइसलैंड पर नाव में सवारी करते हुए गुम हो गए थे। जिसके बाद घरवालों ने उन्हें मरा हुआ समझ लिया, लेकिन चमत्कार तब हुआ अब उसके ठीक 13 महीनों बाद वो मौत को समुद्र में ही मात देकर वापस आ गए। सल्वाडोर आइसलैंड पर मछली पकड़ रहे थे लेकिन प्रसांत महासागर में तूफान आने के कारण उनकी नाव दिशा भटक कर प्रसांत महासागर में पहुंच गई और क्षतिग्रस्त भी हो गई। सल्वाडोर इसी टूटी-फूटी नाव पर सवार रहे और 5000 मील का सफर करते हुए जैसे तैसे करके मैक्सिको के तट के पास पहुंचे जहां सल्वाडोर के मछुआरों ने उन्हें देखकर अपने जहाज पर ले लिया। सल्वाडोर ने अपने इस कठिन समय में मछली, पक्षी, कछुए खाने समेत खुद का पेशाब, पक्षियों का खून और बारिश का पानी पीकर जिंदा रखा, लेकिन आखिरकार मौत को मात दे ही दी।

पाउ पाउ शहर में व्हीलचेयर बैठकर गली पार करते समय ट्रैफिक लाइट पर रूक गए। उसी समय उनके पीछे से एक ट्रक आया जो उनके पीछे रूक, लेकिन ट्रक चालक बेन को नहीं देख सका और ट्रक दौड़ा दिया। जिसके बाद जो हुआ उस पर यकीन करना मुश्किल है लेकिन देखने वालों की भी सांसे थम गई। 50 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ रहे ट्रक के आगे व्हीलचेयर पर बैठे बेन भी उसकी रफ्तार में 4 मील तक घिसटते चले गए लेकिन उनका कुछ नहीं हुआ। इसी घटना के चलते बेन टीवी और न्यूज पेपर में सुखियां भी बने।

अंतरिक्ष से जब पत्थर धरती पर गिरता है तो उसके आस-पास के मकान तक गिर जाते हैं और ऎसा ही हादसा हॉग्स के साथ भी हुआ, लेकिन वो मरी नहीं। यह घटना 1954 की जब अल्बामा के सिलाकौगा में रहने वाली हॉग्स अपने मकान के जिस कमरे में सो रही थी उसी में आसमान से 4 किलो वजनी पत्थर गिरा। पत्थर के गिरने की गति इतनी तेज थी की घर की छत में छेद होकर वह कमरे में लकड़ी के बॉक्स में रखे रेडियो पर गिरा जो चूर-चूर हो गया। रेडियो हॉग्स बहुत ही कम दूरी पर था। हालांकि इस हादसे में हॉग्स के पेट में चोटें आई लेकिन जैसे-तैसे करके वह टूटे कमरे से बाहर निकल गई और जिंदगी बच गई।

यह घटना 13 सितंबर 1848 की की जब रेल्वे में कार्यरत गेग एक छेद में गन पाउडर, फ्यूज और मिट्टी से भर कर लोहे के सरिए से ठोक रहे थे। इसी बीच गन पाउडन में चिंगारी भड़क गई और विस्फोट हो गया। विस्फोट के दौरान लाहे का सरिया गेग की कनपटी से होते हुए सिर के ऊपरी हिस्से से निकल गया और वो खुद भी विस्फोट स्थल से 30 यार्ड की दूरी पर जा गिरे। होश आने पर गेग खुद चलकर अस्पताल गए जहां उनकी खोपड़ी में धंसा सरिया निकाला गया। मौत को मात देने वाले गेग की खोपड़ी के नमूने आज भी बोस्टन के वॉरेन एनाटॉमिकल म्यूजियम में रखे हुए हैं।

यह घटना स्वीडन के उत्तरी छोर वाले बर्फीले इलाके की है जहां 2012 में दो स्नोमोबाइलर्स ने बर्फ में दबी एक कार देगी। लेकिन जब उन्होंने कार के पास जाकर देखा तो होश उड़ क्योंकि उसमें एक आदमी था। यह आदमी पीटर जो पिछले 60 दिन से उसी में बंद था। बर्फ में दबी कार में पीटर 60 दिन तक कैसे जिंदा रहा है इससे भी साबित होता है कि मौत ऊपर वाले के चाहने पर ही आती अथवा नहीं।

डेटॉयट के एक स्कूल में पढ़ने वाली एलेक्सिस जब 7 साल की थी तब उनके साथ यह हादसा हुआ। एक दिन उनकी मां के एक्स ब्वॉयफ्रेंड ने उन्हें और उनकी मां को बंदूक के दम पर एक कार में बिठा लिया। इसके बाद ऎलेक्सिस की मां को हाथ और सिर में गोली मार दी। यह होता देख ऎलेक्सिस हमलावर पर झपटती हुई मां के सामने आ गई। इसी बीच हमलावर ने एलेक्स को 6 गोलियां मारी और भाग गया। लेकिन इसके बावजूद ऎलेक्सिस और उनकी मां की जान बच गई।

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