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बचपन की यादें जब मां ने दिया था “पहला सबक”

क्या आपको याद है जब आप बेहद छोटे थे तो आपकी मां किस तरह आपका ध्यान रखा करती थी। आइए याद करते हैं कुछ ऎसी ही पुरानी यादों को

जब आग से पहली बार जल गया था

हाथ अक्सर छोटे बच्चे आग की तरफ आकर्षित होकर उसे छूने की कोशिश करते हैं। हम सबने अपने बचपन में ऎसा किया है। लेकिन इसके साथ ही हम सभी को मां से डांट भी मिलती थी जिसके बाद हम दुबारा आग के पास नहीं जाते थे। निश्चित रूप से मां हमें बचाने के लिए ही ऎसा किया करती थी।

जब हम फ्रिज का दरवाजा खोलते थे

जब हम फ्रिज का दरवाजा खोलने की कोशिश करते थे तो मां अक्सर मीठी सी डांट खिलाती थी। आज भी वो दृश्य याद कर मन सहज ही उल्लासित हो उठता है जब हम बचपन में गर्मी में फ्रिज का दरवाजा खोल कर उसके सामने खड़े हो जाया करते थे और ठंड का आनंद लेते थे लेकिन इसी दौरान मां आती और डांट कर फ्रिज का दरवाजा बंद कर देती थी।

आज भी याद है टीके लगवाना

इंजेक्शन लगने के डर से बड़े-बड़े लोग पीछे हट जाते हैं। ऎसे में बच्चों को टीका लगवाना बड़ा ही कठिन होता था। आपको आज भी याद होगा कि किस तरह छुटपन में मां टीका लगने के बाद प्यार से चुप कराती थी। वो चुपके से गोद में समेट लेती और सिर पर हाथ फिराते हुए प्यार करती थी।

जब पड़ती थी पापा से डांट

बचपन में पापा से डांट पड़ने पर भी मां ही बचाती थी। अक्सर वो पापा का ध्यान इधर-उधर भटकाकर हमें प्यार से अपनी गोद में छिपा लेती थी और रोते हुए को चुप कराती थी।

जब पहली बार स्कूल गए थे

मां के साथ पहली बार स्कूल जाने में बच्चे बड़ा ही अजीब सा अनुभव करते हैं। उनके जीवन में पहली बार होता है जब वो अपनी मां से दूर बिल्कुल अजनबियों के बीच इतनी देर बिताते हैं। जाहिर तौर पर हर बच्चे को इसके लिए मां ही मानसिक रूप से तैयार करती है तभी वो स्कूल जा पाते हैं और ज्ञान के पथ पर पहला कदम रखते हैं।

जब फ्रेंड से होते हैं नाराज

आज भी सहज ही याद हो आता है कि हम बचपन में अपने फ्रेंडस से जल्दी-जल्दी नाराज हो जाया करते थे और जल्दी ही मान भी जाया करते थे। लेकिन तब मां ही अपने प्यार से मनाती थी और दोस्तों के साथ प्यार से रहने के लिए समझाती थी।

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