Hindi shayri:-तेरे इश्क में दीवानी हूँ तू है समां…

हाथ से बीतते हुए लम्हों को कैसे रोकूँ,
जो मुकद्दर-ए-ज़िन्दगी है उसे कैसे टोकूं,
खुदा न करे कि ऐसा लम्हा आये,
जो सारी ख्वाहिशों को संग ले जाए,
इजाज़त बस खुदा से इतनी चाहिए,
जितनी भी ज़िन्दगी है बस तेरी याद में बीत जाये।


संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।


काँच का तोहफा ना देना कभी,
रूठ कर लोग तोड दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हो उनसे प्यार मत करना,
अकसर अच्छे लोग ही दिल तोड दिया करते है।


तेरे इश्क में दीवानी हूँ

तू है समां मैं तेरी परवानी हूँ

जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला,
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला..

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