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दशहरा 2017 : इस जगह पूरे ढाई महीने तक मनाया जाता है दशहरा का पर्व

दशहरा 2017 : छत्तीसगढ़ के बस्तर में 75 दिनों तक लगातार दशहरा मनाया जाता है।

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। हिंदू धर्म का यह पर्व देशभर में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इससे पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जिसके बाद दसवीं को या विजयदश्मी के रूप में मनाया जाता है। इस बार 30 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन को भगवान राम के लंका नरेश रावण का वध करने की खुशी में मनाया जाता है। हालांकि देशभर में जगह जगह दशहरो की शाम रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। इससे पहले कई जगहों पर रामलीला होती है।

आपको बता दें कि यूं तो दशहरा केवल एक ही दिन मनाए जाने वाला पर्व है, लेकिन हमारे देश में ही एक जगह ऐसी है जहां ढाई महीने तक दशहरा मनाया जाता है। के में 75 दिनों तक लगातार दशहरा मनाया जाता है। यहां रथ खींचने की एक प्रथा चलती है। जिसका अधिकार केवल किलोपाल के माडिय़ा लोगों को ही है। रथ खींचने के लिए जाति का कोई बंधन नहीं होता। हर गांव से परिवार के एक सदस्य को रथ खींचना ही पड़ता है। इसकी अवहेलना करने पर परिवार की आर्थिक स्थिति देखते हुए जुर्माना भी लगता है।

विजयादशमी 2017 : दशहरा क्यों मनाया जाता है, विजयादशमी कैसे मनाये जाने।

में किलेपाल परगना से दो से ढाई हजार ग्रामीण रथ खींचने आते हैं। इसके लिए पहले घर घर से चावल, नकदी और रथ खींचने के लिए सियाड़ी के पेड़ से बनी रस्सी जमा की जाती है। बस्तर के इस अनोखे दशहरे को देखने बड़ी संंख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। हैरत वाली बात यह है कि यहां दशहरा ढाई महीने तक तो मनाया जाता है लेकिन रावण का वध नहीं किया जाता।

13 दिनों तक बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी सहित अन्य देवी देवताओं की पूजा की जाती है। माना जाता है कि यह परंपरा 500 वर्ष पुरानी है। 75 दिनों के इस सेलिब्रेशन में काछनगादी, पाट जात्रा, , मावली जात्रा, भीतर रैनी, बाहर रैनी व मुरिया दरबार मुख्य रस्में होती हैं।

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