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Dussehra 2017 : इन जगहों पर भगवान राम नहीं रावण की होती है पूजा

vijaydashmi 2017 : दशहरा पर राम नहीं रावण की होती है पूजा

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इन दिन ने लंका में का वध किया था। हर साल देशभर में धूमधाम से का पर्व मनाया जाता है। कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, मेले भरते हैं। भगवान राम की पूजा भी की जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां दशहरे के दिन भगवान राम की नहीं बल्कि की पूजा होती है। इस साल दशहरा 30 सितंबर को मनाया जाएगा।

मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर में विजयदशमी के दिन भगवान राम की नहीं बल्कि रावण की पूजा की जाती है। अब आप यह सोच कर हैरान हो रहे होंगे कि भारत का हिस्सा होने के बावजूद मंदसौर में ऐसी प्रथा क्यों है। आपको बता दें कि मंदसौर का पुराना नाम दशपुर था। यहां रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था, इसलिए ही इसका नाम बाद में मंदसौर पड़ा। मंदसौर रावण का ससुराल होने के कारण यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि यहां रावण की पूजा होती है।

बिसरख

उत्तर प्रदेश के बिसरख नाम के गांव में भी रावण की पूजा होती है। यह गांव रावण का ननिहाल माना जाता है। रावण के पिता विश्वेशरा के कारण ही इसका नाम बिसरख पड़ा है।

जसवंतनगर

उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। उसके बाद रावण के टुकड़े कर दिए जाते हैं और तेरहवें दिन रावण का तेरहवां भी किया जाता है।

अमरावती

महाराष्ट्र के अमरावती के गढ़चिरौली में आदिवासी लोग दशहरे के दिन रावण की पूजा करते हैं। यह आदिवासी समुदाय रावण को अपना देवता मानते हैं।

कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी रावण की पूजा होती है। असल में रावण ने यहां भगवान शिव की घोर तपस्या की थी और उसे भगवान भोलेनाथ ने मोक्ष का वरदान भी दिया था। यही वजह है कि यहां रावण का पुतला नहीं फूंका जाता।

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