खुशखबरी! सरकारी शिक्षकों की तरह अब इतने साल की उम्र तक पढ़ा सकेंगे अतिथि शिक्षक

Athiti Shikshak Latest News in hindi : अतिथि शिक्षकों की मदद करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीति को मंजूरी प्रदान की है। इस नीति के लागू हो जाने के बाद अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) भी सरकारी शिक्षकों की तरह 60 साल की उम्र तक स्कूलों में बच्चों को पढ़ा सकेंगे। दिल्ली सरकार के इस फैसले को लाभ दिल्ली में कार्यरत 22 हजार अतिथि शिक्षकों को मिलेगा। मीडिया को यह जानकारी दिल्ली सरकार की शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने दी। गौरतलब है कि बीते 28 फरवरी को अपना कॉन्ट्रेक्ट खत्म हो जाने के बाद अतिथि शिक्षक काम करने की इजाजत नहीं मिलने पर पिछले सप्ताह से सिसोदिया के आवास पर प्रदर्शन कर रहे थे।

नीति के बारे में सिसोदिया ने मीडिया को दी जानकारी
अतिथि शिक्षकों के बारे में बनाई गई नीति के बारे में मीडिया से चर्चा करते हुए शिक्षामंत्री सिसोदिया ने कहा कि वह उपराज्यपाल अनिल बैजल से मंजूरी लेने के लिए उनसे मिलेंगे। बता दें बैजल दिल्ली में सेवा मामलों के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, सेवाओं के प्रमुख होने के नाते बैजल न केवल तबादले और तैनाती के लिए, बल्कि शिक्षा विभाग सुचारु रूप से काम करे, इसके लिए भी वे उत्तरदायी है।

58 हजार में से 22 हजार तो अतिथि शिक्षक
सिसोदिया ने जानकारी दी कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 64 हजार पदों में से 58 हजार पद भरे हुए हैं, जिसमें नियमित और Athiti Shikshak दोनों शामिल हैं। इन 58 हजार में से 22 हजार तो अतिथि शिक्षक हैं, जिन्हें रिक्ति सूचनाओं के माध्यम से समय-समय पर योग्यता के आधार पर भर्ती किया गया है। मंत्री ने कहा कि अतिथि शिक्षकों की नौकरी को बचाने के लिए केजरीवाल सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।

2000 शिक्षकों को नौकरी से निकाला
सिसोदिया ने कहा कि वे दो साल से कह रहे हैं कि अतिथि शिक्षकों को स्थायी किए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, पिछले माह अचानक 28 फरवरी से दो हजार शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया। मेरी चिंता केवल इन शिक्षकों को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि अगर कुल 58 हजार शिक्षकों में से 22 हजार सेवा में नहीं होंगे तो हम स्कूल कैसे चलाएंगे। इतना ही नहीं इस कदम के लिए उन्होंने मौजूदा केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका मानना है कि केन्द्र की मौजूदा भाजपा सरकार शिक्षा विभाग को बेकार करना चाहती है।

मनीष का कहना है कि इस नीति को कैबिनेट की ओर से मंजूरी मिलने बाद यह उन सभी अतिथि शिक्षकों के लिए लागू होगी, जिन्हें योग्यता के आधार पर भर्ती किया गया है।

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