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Pak Vs Eng: शतक जड़ते ही पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम ने दिखाई औकात, घमंड में कही बड़ी बात

नई दिल्लीः पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला का पहला मैच रावलपिंडी में खेला गया था। इस मैच में मेहमान टीम इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 74 रन से मात दी थी। वहीं अब श्रृंखला का दूसरा मैच 9 दिसंबर (शुक्रवार) से मुल्तान में खेला जाएगा। यह मुकाबला दोनों ही टीम के लिए बहुत अहम होगा पाकिस्तान टीम इस मुकाबले को हर हाल में जीतने की कोशिश करेगी। अगर उसे श्रृंखला में बराबरी करनी है तो। वहीं इंग्लैंड की टीम श्रृंखला को अपने नाम करने के लिए इस मैच को जीतना चाहेगी। इस मैच से पहले पाकिस्तान टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज बाबर आजम ने बड़ा बयान जारी कर दिया है।

दूसरे टेस्ट से पहले बाबर ने जारी किया बयान

रावलपिंडी में खेले गए पहले टेस्ट में पाकिस्तान को हार का सामना भले ही करना पड़ा। लेकिन खराब फॉर्म से जूझ रहे पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम फिर से लय में दिखे। उन्होंने मैच के पहले पारी में ताबड़तोड़ बैटिंग कर शतक भी जड़ा और आलोचकों की बोलती बंद की। इस पार्टी के बाद उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा। लेकिन शतक जड़ने के बाद उनके बात करने के तरीके में अकड़ भी बहुत दिखा।

मुल्तान टेस्ट से पहले हुए प्रेस कांफ्रेंस में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह किसी तरह के प्रेशर या दबाव में थे? तो इसका जवाब मैं बाबर ने बोला कि “मुझपर दबाव नहीं है. मैं किसी का दबाव नहीं लेता. मैं यहां पर किसी को साबित करने नहीं आया कि मैं कैसा बल्लेबाज हूं. मुझे किसी को कुछ नहीं दिखाना है. मैं बस अपने क्रिकेट का मजा लेना चाहता हूं. मेरी कोशिश यही रहती है कि जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है उसे पूरा करूं. मेरा काम अपना 100 प्रतिशत देना और टीम को जीत दिलाना है. अब परफॉमेंस होना न होना मेरे हाथ में नहीं है. हर खिलाड़ी चाहता है कि वह हर मैच में बेस्ट करें. लेकिन क्रिकेट में सब दिन एक जैसे नहीं होते.”

बाबर ने कहा लोगों की नहीं सुनते हैं वह कोई कुछ भी कह रहा हो। बाबर ने आगे इस बात को भी बताया कि जब भी वह कोई गलती करते हैं तो उससे सीखने की कोशिश करते हैं। साथ ही उन्होंने बोला बुरे वक्त में आप कैसे अच्छा करने की कोशिश करते हैं वह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। बाबर ने आगे कहा

“इंसान को सीखना चाहिए. जब भी कोई गलती होती है मैं उससे सीखता हूं. खुद में सुधार करता हूं. अच्छे में तो आप अच्छा ही देखते हैं लेकिन बुरे में आप अच्छा कैसे करते हैं यह ज्यादा अहम है. मैं लोगों की नहीं सुनता कि कौन क्या कह रहा है. खराब फॉर्म के बाद मैं लोगों की नहीं सुनता कि यह करना चाहिए वह करना चाहिए. लोगों का काम कहना ही है. मेरा काम है परफॉर्म करना है और टीम को जिताना है. मैं वही करता हूं।

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