ईरान 2015 के परमाणु समझौते के कुछ हिस्सों से बाहर हुआ

ईरान ने आधिकारिक रूप से 2015 परमाणु समझौते की प्रतिबद्धताओं की स्वीकृति को समाप्त कर दिया है। देश के परमाणु ऊर्जा निकाय ने बुधवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी एफे न्यूज के अनुसार, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के एक अधिकारी ने आईएसएनए समाचार एजेंसी को बताया, “जैसा कि एसएनएससी (सुप्रीम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद) में रेखांकित किया गया है, जेसीपीओए (ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन) के तहत अपने कुछ दायित्वों को देश अब लागू नहीं करेगा।”

अधिकारी ने कहा, “समृद्ध यूरेनियम के उत्पादन और अराक प्लांट में ‘भारी जल’ के असीमित उत्पादन से संबंधित कार्यक्रमों को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा।”

8 मई को, राष्ट्रपति हसन रूहानी ने चेतावनी दी थी कि यदि वैश्विक शक्तियां अगले 60 दिनों के भीतर अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में विफल रहती हैं तो ईरान समझौते के प्रमुख पहलुओं से हटना शुरू कर देगा।

वाशिंगटन ने इस्लामी गणतंत्र पर अपने प्रतिबंधों को कड़ा करने की चेतावनी दी थी, ईरान की मांगों को पूरा करने और देश की बैंकिंग प्रणाली व अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से तेल व्यापार को बचाने के लिए रूहानी ने संधि पर 60 दिनों का निलंबन जारी किया।

उन्होंने कहा था कि इसका अर्थ यह होगा कि ईरान अपनी ‘समृद्ध यूरेनियम’ और दी गई सीमा से परे ‘भारी जल’ को बेचने के लिए शर्त का पालन नहीं करेगा, जिसके लिए उसने 60 दिन की समय सीमा निर्धारित की थी।

यह घोषणा अमेरिका द्वारा जेसीपीओए को छोड़ने के ठीक एक साल बाद हुई, जिसमें रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ ईरान ने सह-हस्ताक्षरकर्ता के रूप में हस्ताक्षर किए थे।

समझौता अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को उठाने के बदले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करता है लेकिन वाशिंगटन के बाहर निकलने के बाद इसे कमजोर कर दिया गया है।

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