Pash | Sabse Khatarnak | सबसे ख़तरनाक़ | Paash Shayari | Hindi Inspirational Poem

Pash Ki Kavita : Sabse Khatarnak | सबसे ख़तरनाक़
Inspirational Poem in Hindi
Punjabi Revolutionary Poet Avtar Singh Sandhu ‘Pash’ (9 September-23 March 1988) was born in a middle class peasant family in village Talwandi Salem, distt. Jallandhar (Punjab). His father Sohan Singh Sandhu, who was a soldier, used to compose poetry. Pash is one of the major poets of Naxalite Movement. In 1972 he started a magazine named ‘Siar’ and in 1973 founded ‘Punjabi Sahit Te Sabhiachar Manch. His poetic works are: Loh Katha (1971), Uddade Bazan Magar (1974), Saade Samian Vich (1978), Khilre Hoey Varkey (1989, posthumously). Source: http://www.punjabi-kavita.com/Avtar-Singh-Pash.php

This poem has been recited by Motivational Speaker Simerjeet Singh (http://www.simerjeetsingh.com) with the intention to educate and inspire the young generation of Paash’s poetry and to motivate them to overcome their own challenges.

This inspirational poem is a Hindi translation of probably his most famous work Sabse Khatarnak:

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नज़र में रुकी होती है

सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है
जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है
जो हर हत्‍याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में
मिर्चों की तरह नहीं पड़ता

सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए
और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती ।

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