सीनियर सिटीजन के लिए बढ़िया मौका, FD पर मिल रहा है तगड़ा रिटर्न, जानें कौन बैंक दे रहा है ज्यादा ब्याज

Rohit P4 min read

बढ़ती उम्र के साथ निवेश का मकसद आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करना है। इसी वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट सीनियर सिटीजन के लिए बेहद पॉपुलर है। एफडी में निवेश करने पर एक तय अवधि तक एक तय ब्याज दर मिलती है।

हालांकि, हर बैंक की ब्याज दर अलग होती है और समय-समय पर इनमें बदलाव भी होता रहता है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि निवेश से पहले उपलब्ध ऑप्शंस की तुलना कर ली जाए ताकि बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके।

सरकारी बैंकों में सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज दरें

देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज दर प्रदान करते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा वरिष्ठ नागरिकों को लगभग 7 प्रतिशत तक का रिटर्न दे रहा है। वहीं पंजाब नेशनल बैंक करीब 6.90 प्रतिशत की दर से एफडी पर ब्याज ऑफर कर रहा है।

इसी तरह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया वरिष्ठ ग्राहकों को लगभग 6.75 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। अन्य सार्वजनिक बैंकों की बात करें तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया दोनों लगभग 6.70 प्रतिशत तक का ब्याज प्रदान कर रहे हैं।

सरकारी बैंकों में निवेश को सुरक्षित माना जाता है और यहां जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है। हालांकि ब्याज दरें निजी बैंकों की तुलना में थोड़ी कम हो सकती हैं।

प्राइवेट बैंकों में ब्याज दरें

निजी क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर देकर आकर्षित कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को लगभग 7.75 प्रतिशत तक का रिटर्न दे रहा है।

इसके अलावा बंधन बैंक और आरबीएल बैंक दोनों करीब 7.70 प्रतिशत की दर से ब्याज प्रदान कर रहे हैं। वहीं आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और इंडसइंड बैंक वरिष्ठ नागरिकों को लगभग 7.50 प्रतिशत तक का रिटर्न दे रहे हैं।

निजी बैंकों में अधिक ब्याज दर मिल सकती है, लेकिन निवेश से पहले बैंक की विश्वसनीयता, क्रेडिट रेटिंग और शर्तों की जांच करना भी जरूरी है।

निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान दें

एफडी में निवेश करते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि अवधि, समय से पहले निकासी पर पेनल्टी, और टैक्स नियमों को भी समझना जरूरी है। सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिलता है, लेकिन यह लाभ बैंक और अवधि के अनुसार अलग हो सकता है। साथ ही, बड़ी रकम निवेश करने से पहले अलग-अलग बैंकों में रकम को बांटा जा सकता है, जिससे जोखिम संतुलित किया जा सके।

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