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जिस घर में किराए पर रहते हैं, गरीब अब खरीद सकेंगे वह घर

घर में रहने के लिए किराया देना किसी को अच्छा नहीं लगता, लेकिन देशभर में बड़ी संख्या ऐसा करने पर मजबूर है। वहीं कई बार ऐसा होता है कि लंबे समय से एक ही घर में किराए पर रहने से वह अपना सा लगने लगता है और किराएदार उसे खरीदना चाहता है। केंद्र सरकार अब ऐसी हाउस रेंट पॉलिसी पर विचार कर रही है, जिसके तहत उनके पास किराए के मकान को आसान किस्तों में पूरी कीमत चुकाकर खरीदने का भी विकल्प होगा। इसके अलावा शहरों में आने वाले प्रवासी लोगों को सरकारी संस्थाओं से मकान किराए पर लेने में सुविधा होगी।

हाउसिंग मिनिस्ट्री के अनुसार इस स्कीम का नाम रेंट टू ओन होगा, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल अर्बन रेंटल हाउसिंग पॉलिसी के तहत लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि इस ऐक्ट को मंजूरी के लिए जल्दी ही कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।

सरकार निजी जमीन पर बने मकानों को खरीदने पर भी गरीब तबके के लोगों को 1.5 लाख रुपए की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। अब तक यह छूट राज्य सरकारों व निकायों की जमीन पर बने आवासों पर ही दी जाती थी। नायडू ने कहा कि वर्ष 2022 तक सबको घर के वादे को पूरा करने का लक्ष्य है। 2019 तक 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। इसमें केरल, हिमाचल, अरुणाचल और जम्मू कश्मीर जैसे राज्य शामिल हैं।

रेंट टू ओन स्कीम के तहत शुरुआत में कुछ निश्चित वर्षों के लिए घर लीज पर दिया जाएगा। खरीदार को हर महीने ईएमआई के बराबर किराया बैंक में जमा करना होगा, इसमें कुछ किराए के तौर पर होगा और बाकी जमा होगा। खरीदार की ओर से जमा की गई ईएमआई की राशि जब 10 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी तब मकान उसके नाम पर रजिस्टर हो जाएगा। अगर लीज पर लेने वाला व्यक्ति रकम जमा नहीं कर पाता है तो सरकार इस मकान को दोबारा बेचेगी। इसके अलावा किराए के साथ जमा की जाने वाली राशि किराएदार को बिना ब्याज वापस लौटा दी जाएगी।