विश्व हिंदू परिषद ने कहा : राम भक्तों ने 28 साल तक झूठे मुकदमों का सामना किया

विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने से जुड़े मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 32 आरोपियों के बरी होने का स्वागत किया है। विश्व हिंदू परिषद ने इसे सत्य और न्याय की विजय बताते हुए कहा कि न्यायालयों को यह निर्णय देने में 28 वर्ष लग गये। विहिप ने कहा कि आशा करते हैं कि इस निर्णय से उन विषयों का पटाक्षेप हो जायेगा, जो गत 472 वर्षों से हिन्दू मानस को व्यथित करते रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार एडवोकेट ने कहा कि राम भक्तों ने इन झूठे मुकदमों का 28 वर्ष तक धैर्य और साहस से सामना किया। इसमें 49 एफआईआर थीं, अभियोजन ने 351 गवाह पेश किये और लगभग 600 दस्तावेज न्यायालय में दिए गये। मुकदमे को सुन रहे न्यायाधीश का कार्यकाल, उनके सेवानिवृत होने के बाद भी कई बार बढ़ाना पड़ा। तब जाकर यह फैसला आ पाया है।

आलोक कुमार ने कहा, “प्रारंभ में सरकार ने 49 लोगों को अभियुक्त बनाया था। हम कृतज्ञता से उन 17 लोगों का पुण्य स्मरण करते हैं, जो इस मुकदमे के चलते वैकुंठ सिधार गये। इनमें अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, परमहंस रामचन्द्र दास, राजमाता विजया राजे सिंधिया, आचार्य गिरिराज किशोर, बाल ठाकरे, विष्णुहरी डालमिया और वैकुण्ठ लाल शर्मा (प्रेम जी) जैसे महानुभाव हैं।”

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि, “सर्वोच्च न्यायलय के 9 नवंबर 2019 के आदेश में यह सदा के लिए घोषित कर दिया है कि अयोध्या की सम्बंधित भूमि रामलला विराजमान की ही है। आज के निर्णय ने षड़यंत्र के आरोपों को ध्वस्त कर दिया है। अब समय है कि हम राजनीति से ऊपर उठें, और बार-बार पीछे देखने की बजाये एक संगठित और प्रगत भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ें।”

उन्होंने कहा, “भारतीय समाज को अब अपना ध्यान आगे आने वाले कार्यों की ओर लगाना है। विश्व हिन्दू परिषद पुन: अपने आप को श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण, सामाजिक ऊंच-नीच को दूर करके समरस समाज की स्थापना, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से पिछड़े अन्य वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उन्नति के लिए समर्पित करती है।”

आलोक कुमार ने कहा, “हमें ऐसा सशक्त भारत बनाना है जो अपने अंदर के और सीमाओं पर की चुनौतियों का सफलता से सामना कर सके। विश्व हिन्दू परिषद मंदिर और उनकी सम्पत्तियों की रक्षा और मंदिरों की आय धर्म एवं समाज हित के कार्यों के लिए ही व्यय होने के लिए भी अपना संघर्ष सतत जारी रखेगी।”

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