सुनीता विलियम्स के शरीर में हो रहा… क्या बच पाईगी उनकी जिंदगी, जानें यहां पूरी कहानी - Times Bull
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सुनीता विलियम्स के शरीर में हो रहा… क्या बच पाईगी उनकी जिंदगी, जानें यहां पूरी कहानी

Zohaib Naseem
March 19, 2025 at 12:38 PM IST

नई दिल्ली: 9 महीने तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर फंसे रहे भारतीय मूल के सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विल्मोर आखिरकार धरती पर सुरक्षित लौट आए हैं। बुधवार सुबह वे एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में फ्लोरिडा के पास समुद्र में उतरे। समुद्र में उनकी पहली लैंडिंग थी। पूरी दुनिया में उनकी सुरक्षित वापसी का जश्न मनाया जा रहा है। सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर, निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और एलन मस्क के स्पेसएक्स स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन से धरती पर लौटे। धरती पर वापसी का उनका 17 घंटे का सफर बेहद सफलतापूर्वक खत्म हुआ।

शरीर में क्या बदलाव आए

दरअसल, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने टेस्ट स्पेसक्राफ्ट स्टारलाइनर में 5 जून 2024 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी थी। उन्हें वहां आठ दिन बिताने के बाद वापस लौटना था, लेकिन स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण यह फंस गया था। इन 9 महीनों में दोनों के शरीर में क्या बदलाव आए हैं और क्या दोनों के शरीर पहले जैसे हो पाएंगे? आइए जानते हैं। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, 2022 में नेचर मैगजीन में कनाडा का एक शोध प्रकाशित हुआ था।

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ओटावा यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन में कहा गया था कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में 50 फीसदी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और जब तक मिशन चलता रहता है, यह स्थिति बनी रहती है। यानी शरीर में खून की कमी हो जाती है। इसे स्पेस एनीमिया कहते हैं। ये लाल कोशिकाएं पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं।

कोच पहले स्थान पर हैं

यही वजह है कि चांद, मंगल या उससे आगे की यात्रा करना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, ऐसा क्यों होता है, इसका कारण अभी भी रहस्य बना हुआ है। इसके अलावा अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है। धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्री कमजोरी और थकान महसूस करते हैं। सुनीता के अंतरिक्ष से धरती पर कदम रखने के साथ ही वह अंतरिक्ष में कुल 286 दिन बिताने वाली शख्सियत बन गई हैं। इसके साथ ही वह एक ट्रिप में ISS पर सबसे ज्यादा दिन बिताने वाली तीसरी महिला वैज्ञानिक बन गई हैं। इस मामले में 328 दिनों के साथ क्रिस्टीना कोच पहले स्थान पर हैं।

हिसाब से विकसित हुआ है

289 दिनों के साथ पिगी वीटसन दूसरे स्थान पर हैं। अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक रुबियो ने एक बार में ISS में सबसे ज्यादा 371 दिन बिताए हैं। ओवरऑल सबसे ज्यादा 675 दिन बिताने का रिकॉर्ड पिगी वीटसन के नाम है। विनोद श्रीवास्तव बताते हैं कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में हर सेकंड 30 लाख लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होती हैं। जबकि, धरती पर यह दर सिर्फ़ 2 लाख प्रति सेकंड है। हालांकि, अंतरिक्ष की तुलना में धरती पर हर सेकंड इंसान की 2 लाख लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होती हैं। धरती पर शरीर इसकी भरपाई कर लेता है क्योंकि शरीर धरती के हिसाब से विकसित हुआ है।

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एक बड़ी चुनौती है

यही वजह है कि चांद, मंगल या उससे आगे की यात्रा करना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों में कैल्शियम कम हो जाता है। धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्री कमज़ोर और थका हुआ महसूस करते हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, सुनीता और बुच को जिन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, उनमें बेबी फीट (एक ऐसी स्थिति जिसमें अंतरिक्ष यात्री अपने तलवों की मोटी त्वचा खो देते हैं), कमज़ोर दृष्टि, चलने में कठिनाई और चक्कर आना शामिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर जीवन के लिए अपनी दिनचर्या फिर से शुरू करने में कई हफ़्ते लग सकते हैं।

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