महाभारत में कुंती ने स्वयंवर में पाण्डु का वरन किया। विवाह के समय उन्होंने अपने आनंदमय वैवाहिक जीवन की कामना की थी पर होनी को कुछ और ही मंजूर था।

उनकी तकदीर में जीवन पर्यन्त संघर्ष करना लिखा था पर वे संघर्षों से टूटी नहीं, हार नहीं मानी और अंत में अपने बेटों का भविष्य सुनिश्चित किया। वे कुंवारी माँ बनीं, बेटे का वियोग सहा, हस्तिनापुर की महारानी बनने के बाद भी जंगलों में भटकीं, पुत्र वधु का अपमान सहा और यहाँ तक की अपने जेष्ठ पुत्र और पोतों की मृत्यु भी देखी।

इतना संघर्ष किया पर फिर भी हमेशा कठिनाइयों में नए रास्ते ढूंढे, हिम्मत और सूझ -बूझ से हर समस्या का हल निकला।  यह सच है कि हर मनुष्य अपना भाग्य लिखवा कर आता है पर यह भी उतना ही सच है कि वो अपनी सूझ-बूझ से उसके असर को कम-ज्यादा जरूर कर सकता है।

Praveen Jain Kochar के अनुसार – अगर ध्यान सिर्फ कष्टों पर केंद्रित रखोगे तो पीड़ा के सिवाय कुछ और हासिल नहीं होगा पर वहीँ अगर बुरे वक्त से सीख ले लो तो संघर्षों के बावजूद सफल होगे।

Recent Posts

Praveen Jain Kochar

Praveen Jain Kochar- An Inspiration for Youngsters ☯ Astrologer 🎬 Storyteller 🎤Spiritual Motivational Speaker Million's of Huge Family on Social Media Platform. A self-made man, a man who struggled...