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Chanakya Niti: ये लोग डालते हैं सफलता में बाधा, कभी भी इनके सामने ना फैलाए हाथ

Chankya Niti: सफलता कौन नहीं चाहता। हर आदमी सफल होना चाहता है। लेकिन उसके लिए कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। भारत के सबसे महान विद्वानों में से एक आचार्य चाणक्य ने सफलता को लेकर कई सारी बातें कही है। आज हम आपकों आचार्य चाणक्य के कहे अनुसार उन व्यक्तियों के बारे में बताएंगे जो आपकी सफलता में बाधा बन सकतें हैं। और आपकों भूलकर भी कभी इनके साथ नहीं जाना चाहिए।

दूसरों की मदद करना ही मानवता है। सच्चा इंसान वहीं है जो मुसीबत में दोस्त ही नहीं दुश्मनों का भी साथ निभाए।चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को कोई निर्णय समय, हालात, नीति और धर्म को मद्देनर करते हुए लेना चाहिए।

आपका भले ही इन दिनो अच्छा वक्त चल रहा है। लेकिन बुरा वक्त कब आ जाए किसे पता। लेकिन यहां चाणक्य ने आपके लिए चेतावनी जारी की है। आचार्य चाणक्य के अनुसार मुसीबत में कभी उन लोगों से मदद की गुहार न लगाएं जो दुश्मन से भी ज्यादा खरतनाक माने गए हैं।

चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में कई सारे ऐसे लोगों का जिक्र किया है। जो आपके आगे तो मीठी मीठी बातें बोलते हैं लेकीन पीठ पीछे आपकी पीठ में छुरा घोंपने का काम करते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा उचित दूरी बनाकर रखना चाहिए। आचार्य चाणक्य के अनुसार इस प्रवृत्ति के लोग आपकी सफलता में बाधा डालने का काम करते हैं। इसलिए इन लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए।

मतलबी आदमी

कई व्यक्ति ऐसे होते हैं जो कभी भी दूसरों की हित के बारे में नहीं सोचते हैं। वो हर चीज़ में केवल अपना हित ही तलाशते हैं। आचार्य चाणक्य ने कहा है कि ऐसे लोग मतलब के लिए आपका साथ देने की हामी भर लेकिन अपने हित को पूरा हो जाने पर नजर भी नहीं आएंगे। इस तरह के लोगों का जब आपसे काम निकल जायेगा। उसके बाद ये लोग आपके पीठ पीछे नुकसान करने से भी नहीं चूकेंगे।

ईर्ष्या रखने वाले

जिस भी इंसान के अन्दर में ईर्ष्या का भाव रहता है वो कभी भी आपका नुकसान कर सकतें हैं। ऐसे लोगों को दूर रहना चाहिए।ईर्ष्या की आग व्यक्ति की इंसानियत खत्म कर देती है। ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति अपने प्रतिद्ंदी को असफल और दुखी देखने की तलाश में ही रहता है।

ऐसे लोग आपके बुरे समय का फायदा उठाकर आपको धोखा दे सकते हैं और सफल होने से रोक सकते हैं।

अधर्मी इंसान

अधर्मी इंसानों से कभी भी मदद नहीं लेना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि अधर्मी व्यक्ति धर्म के मार्ग से भटका होता है। इसी वजह से ये पाप के कामों को करने से भी पीछे नहीं हटता है।चाणक्य कहते हैं ऐसे लोगों के संपर्क में रहने और उनकी मदद करने से व्यक्ति को अपमानित होना पड़ता है।

डिस्क्लेमर: ऊपर लिखी गईं तमाम बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी खबर की पुष्टि नहीं करते हैं। ये खबर आम धारणाओं पर आधारित है।किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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