10 साल पहले मां-बाप को खोया, अब 11 साल बाद जीता मेडल! जाने अमन शेरावत की दुख भरी कहानी - Times Bull
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10 साल पहले मां-बाप को खोया, अब 11 साल बाद जीता मेडल! जाने अमन शेरावत की दुख भरी कहानी

Prakash Potnis
August 11, 2024 at 8:24 AM IST

Aman Sherawat Haryana News: पेरिस में हो रहे ओलंपिक खेलों में हरियाणा के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। झज्जर के अमन सहरावत ने भी कुश्ती मुकाबले में कांस्य पदक जीता। इस जीत से अमन के पैतृक गांव में जश्न का माहौल है। इस मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। अमन के घर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। मैच देखने के लिए उनके घर के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी, जिसके सामने गांव के लोग अपने लाडले बेटे का मैच देखने के लिए उमड़ पड़े। अमन के चाचा ने बताया कि जब उनका बेटा भारत लौटेगा तो उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा।

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रवि दहिया को मानते थे गुरु

बता दें कि भारत ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में लगातार 2 ओलंपिक पदक जीते हैं। इससे पहले रवि दहिया 2020 में हुए टोक्यो ओलंपिक में भी भारत की ओर से रजत पदक जीत चुके हैं। रवि और अमन दोनों ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण प्राप्त किया। अमन रवि को अपना गुरु मानते थे, लेकिन राष्ट्रीय ट्रायल के दौरान उन्होंने रवि दहिया को हराकर क्वालीफायर में जगह बनाई और ओलंपिक का टिकट पक्का किया।

ऐसी रही उनकी जिंदगी

2003 में झज्जर जिले में जन्मे अमन के माता-पिता का देहांत 2014 में हो गया था। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। 2013 में उनकी मां कमलेश के बाद 2014 में उनके पिता सोमवार का भी देहांत हो गया। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद परिवार ने अमन को छत्रसाल स्टेडियम भेजने की योजना बनाई। उससे 6 महीने पहले उनकी मां का देहांत हो गया और स्टेडियम जाने के 6 महीने बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया। साल 2021 में उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपना पहला खिताब जीता।

अमन एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं

एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमन के हिस्से में ढाई एकड़ जमीन है। माता-पिता की मौत के बाद उनके चाचा, ताऊ और दादा ने उनका पालन-पोषण किया। अमन की बहन पूजा बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही है। उसके दादा मांगेराम, चाचा सुधीर, जयवीर और चाचा रणवीर, कर्मवीर, वेदप्रकाश व अन्य परिजन गांव से कुछ किलोमीटर दूर नौगांव की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर बनी ढाणी में रहते हैं।

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