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हाईजैक जाफर एक्सप्रेस के अंदर BLA ने किसको, कितनों के साथ किया… सच जानकर उड़ गए होश

Zohaib Naseem
March 13, 2025 at 2:12 PM IST · 1 min read

नई दिल्ली: पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में 440 यात्रियों को ले जा रही पैसेंजर ट्रेन पर हमला करने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के सभी 33 हमलावर बुधवार (12 मार्च) रात को मारे गए। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने आखिरकार लंबी मुठभेड़ में सफलता हासिल की और बंधकों को छुड़ा लिया। हालांकि, इससे पहले BLA के लड़ाकों ने 21 बंधकों को मार गिराया था। इस भयावह मंजर को देखने वाले यात्री अब अपनी कहानी बता रहे हैं। इन बंधकों ने बताया कि कैसे BLA के लड़ाकों ने ट्रेन पर कब्जा कर लिया था और पहचान पत्र देखकर गोली चला रहे थे। BLA ट्रेन अपहरण के दौरान मुहम्मद नवीद भागने में कामयाब हो गया था।

नुकसान नहीं पहुंचाया

AFP से बात करते हुए उसने कहा, ‘हमें एक-एक करके ट्रेन से बाहर आने को कहा गया। सबसे पहले महिलाओं को अलग किया गया और ट्रेन से उतरने को कहा गया। उन्होंने बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा। हमें बताया गया कि हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, लेकिन जब कुल 185 लोग बाहर निकले तो उन्होंने उनमें से कुछ को चुनना शुरू कर दिया और गोली चलानी शुरू कर दी।’ 38 वर्षीय ईसाई मजदूर बाबर मसीह ने एएफपी को बताया, ‘हमें रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक अस्पताल जाना था। बीच रास्ते में यह सब हुआ। हमारे घर की महिलाओं ने उनसे प्रार्थना की, फिर वे हमें छोड़कर चले गए और कहा कि पीछे मुड़कर मत देखना। जब हम वहां से भाग रहे थे, तो मैंने देखा कि हमारे साथ कई और लोग भी भाग रहे थे।

पाकिस्तानी सेना के हाथों मारे गए

पंजाब प्रांत के गुजरांवाला जिले के निवासी नोमान अहमद भी ट्रेन में थे। वे ईद के लिए अपने परिवार के साथ घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। NYT से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब हमने विस्फोट की आवाज सुनी, तो हम फर्श पर लेट गए और गोलियों से बचने के लिए ट्रेन के दरवाजे बंद कर दिए। अहमद कहते हैं, ‘थोड़ी देर में एक लड़ाका आया और महिलाओं और बुज़ुर्गों को बाकी यात्रियों से अलग कर दिया. उन सभी को ट्रेन से उतरने को कहा गया.

कुछ घायल यात्री अभी भी ट्रेन में थे. उन्हें भी बाहर आने को कहा गया, जब वे बाहर नहीं आए तो लड़ाकों ने उन सभी को गोली मार दी. जफ्फर एक्सप्रेस क्वेटा से पेशावर जा रही थी. बीच में ही बीएलए ने ट्रैक उड़ा दिया, जिसके बाद ट्रेन को वहीं रोकना पड़ा. बीएलए की कई मांगें थीं जिन पर वह सरकार को झुकने पर मजबूर करना चाहता था. हालांकि, उनका मिशन कामयाब नहीं हो सका और सभी अपहरणकर्ता लड़ाके पाकिस्तानी सेना के हाथों मारे गए.

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