Holi Bhai Dooj 2025: 15 या 16 मार्च जानिए कब है ‘होली भाई दूज’? साथ ही मुहूर्त और पूजा विधि भी! - Times Bull
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Holi Bhai Dooj 2025: 15 या 16 मार्च जानिए कब है ‘होली भाई दूज’? साथ ही मुहूर्त और पूजा विधि भी!

Neelam Chauhaan
March 15, 2025 at 9:22 AM IST

Holi Bhai Dooj 2025: भाई दूज का त्योहार भाई – बहन के स्नेह और अटूट प्यार के बंधन के त्योहारों में से एक है। साल में दो बार इस पर्व को धूम धाम के साथ मनाया जाता है। एक दीपावली के बाद और दूसरा होली के बाद, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष कि द्वितीया को। भाई – दूज के इस पर्व को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। खास बात ये है कि इस साल यानि कि 2025 में तारीख़ को लेकर के लोगों के असमंजस स्थिति बनी हुई है।

ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि होली में पड़ने वाली भाई दूज किस किस दिन मनाई जाएगी? साथ ही पूजा विधि के बारे और तिलक लगाने के शुभ मुहूर्त के बारे में भी।

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होली भाई दूज 2025 ( Holi Bhai Dooj 2025):

  • • चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष कि द्वितीया तिथि कि शुरुआत :

द्वितीया तिथि 15 मार्च साल 2025 को दोपहर के 02 बजकर 33 मिनट पर आरम्भ है।

• द्वितीया तिथि कि समाप्ति : 16 मार्च साल 2025 को शाम के 04 बजकर 58 मिनट पर समाप्ति हो जाएगी।

होली भाई दूज 2025 भाई को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त ( Holi Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurat)

सनातन धर्म के पंचाग के अनुसार, 16 मार्च को द्वितीया तिथि शाम के 04 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। अपनी इच्छा के अनुसार सुबह से लेकर के शाम को 4:58 तक कभी भी तिलक कर सकते हैँ।

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भाई- दूज में भाई को इस तरह से लगाएं तिलक (Bhai – Dooj Tilak Vidhi 2025)

भाई – दूज के खास दिन सभी बहनें अपनी भाइयों को तिलक लगाती हैँ। बहनें एक थाली लें और इसमें पूजा कि सामग्री रखें जैसे लाल चंदन में गंगा ज़ल को मिला फिर तिलक बना लें। अगर चंदन नहीं मिल पा रहा है तो हल्दी, चूना और ज़ल डालकर तिलक तैयार कर लें। साथ में थोड़ा सा अक्षत और मुँह मीठा करवाने के लिए खीर या मिठाई रख लें। सबसे पहले तिलक को भगवान विष्णु जी के चरणों में लगाना है। फिर अपने भाई को उत्तर – पूर्व दिशा कि ओर बिठाएं और सिर में कपड़ा या रुमाल को डालें। इसके बाद उसे तिलक, अक्षत लगाने के साथ मीठा लगाएं। अब भाई अपनी बहनों के पैर को छूकर उनसे आशीर्वाद लें।

बहनें भाई को भोजन जरूर करवाएं:

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस खास दिन यमराज अपनी बहन यमुना जी के घर भोजन करने के लिए गए थे और खुश होकर उन्हें ये आशीर्वाद दिया था कि, जो भी भाई चैत्र महीने कि द्वितीया तिथि को अपनी बहन के यहाँ भोजन करने जाएगा, उसके जीवन में आने वाली सभी समस्याएं और क़ष्ट दूर हो जाएंगे। साथ ही आकाल मृत्यु का भय दूर हो जाएगा।

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