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बेहद आसान जांच से पता चल जाती है किडनी की खराबी

भारत में अब भी गुर्दों (किडनी) से संबंधित बीमारियों के बारे में जागरूकता का स्तर बेहद कम है। हकीकत तो यह है कि लोगों को किडनी या गुर्दे खराब होने में पता ही तब चलता है जब वह करीब 40 प्रतिशत खराब हो जाता है। ये स्थिति तब है जबकि देश में गुर्दे की खराबी पता करने के लिए एक बेहद आसान आधुनिक जांच उपलब्ध है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान के नेफ्रोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉक्‍टर एस.सी. तिवारी सेहतराग से बातचीत में कहते हैं कि ग्लोमेरूलर फिल्टरेशन रेट (जी.आर.एफ) नामक टेस्‍ट से यह पता चल जाता है कि किडनी कितनी क्षमता से काम कर रहा है। किडनी की बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता चल जाए तो मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण या डायलिसिस जैसे महंगे और जटिल परिस्थितियों का सामना करने से बचाया जा सकता है।क्‍या है किडनी का काम डॉक्‍टर तिवारी कहते हैं,

गुर्दे की खराबी को इस प्रकर समझा जा सकता है कि गुर्दा और हृदय शरीर को आवश्यक तत्वों की आपूर्ति करते हैं। जब शरीर इन तत्वों की मांग अधिक करने लगे तो गुर्दों और हृदय पर जोर पड़ता है। इस स्थिति में गुर्दा कमजोर होना शुरू हो जाता है। इसे सप्लाई चेंज डिसऑर्डर कहते हैं। गुर्दे का मुख्य काम है शरीर के विषैले तत्वों को निकालना और हड्डियों को मजबूती देना। इसके साथ शरीर में एसिड की मात्रा को नियंत्रित करना, रक्तचाप को नियंत्रित करना शरीर के इसी हिस्से का काम है।किडनी खराबी के लक्षण गुर्दा खराब होने लगे तो कुछ खास लक्षण इसके बताते हैं। पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा हो जाना, पेशाब में खूबन आना, जलन से कमर में दर्द, आंखों के नीचे सूजन, रक्तचाप बढ़ जाना, भूख कम लगना आदि इसके आम लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो तत्काल किसी गुर्दा विशेषज्ञ से सलाह करना चाहिए।मधुमेह के रोगी खास ध्‍यान रखें मधुमेह के रोगियों में किडनी की खराबी की समस्या आम होती है।

इसलिए उनको नियमित रूप से इसकी जांच करवानी चाहिए। खास बात यह है कि गुर्दे की समस्या पूरी तरह जीवनशैली से जुड़ी होती है। भागदौड़ वाली जिंदगी, देर से सोना और देर से जगना, व्यायाम न करना, खाने में फास्टफूड की मात्रा में वृद्धि आदि के कारण अब गुर्दे की खराबी कम उम्र में भी होने लगी है। इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि व्यायाम और योग की दिनचर्या में शामिल किया जाए। खाने में नमक की मात्रा कम रखें।किडनी फेल जैसा कुछ नहीं होता डॉक्‍टर तिवारी कहते हैं, आमतौर पर गुर्दे की बीमारी के बारे में कहा जाता है कि फलां व्यक्ति के गुर्दे फेल हो गए। दरअसल ऐसी कोई स्थिति नहीं होती। गुर्दे के काम करने की क्षमता कम या अधिक हो सकती है मगर गुर्दे फेल नहीं होते।

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