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माइग्रेन: ये दर्द जानलेवा नहीं

माइग्रेन या अधकपारी सिर का ऐसा दर्द है जो असह्य प्रतीत होता है। सिर के एक हिस्‍से में तेज दर्द के साथ-साथ कभी कभी जी मितलाना और उल्‍टी के लक्षण भी होते हैं। मस्तिष्‍क में होने वाले कुछ बदलावों के कारण या शरीर में हार्मोन के असंतुलन के कारण माइग्रेन हो सकता है। इसके अलावा धूप, तेज रो‍शनी या तेज आवाज के कारण यह दर्द भड़क सकता है। सवाल है कि क्‍या माइग्रेन जानलेवा बीमारी है। दिल्‍ली के प्रतिष्ठित सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्‍ठ न्‍यूरो सर्जन डॉ. सी.एस. अग्रवाल के अनुसार यह बीमारी कैसी भी हो मगर जानलेवा तो कतई नहीं है। उनका कहना है कि आम लोगों में यह भ्रम फैला हुआ है कि माइग्रेन बेहद गंभीर बीमारी है और इससे छुटकारा मिलना लगभग असंभव है। वास्तविकता यह है कि यह बेहद ‘मासूम’ सी बीमारी है और जानलेवा तो कतई नहीं। डॉक्‍टर अग्रवाल के अनुसार सिर में असह्य दर्द को छोड़ दिया जाए तो यह अहानिकारक रोग है। ज्यादातर लोगों में यह रोग आनुवंशिक होता है। मस्तिष्क के दर्द नियंत्रण पद्धित में किसी विकृति के कारण माइग्रेन एक तरंग की तरह शुरू होता है और धीरे-धीरे फैसला है। किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा किए इलाज में सफलता निश्चित है।

माइग्रेन के इलाज के लिए सबसे पहले इसे भड़काने वाले कुछ कारकों की पहचान कर लेनी चाहिए। मसलन, किसी मरीज को यह पता होता है कि वह धूप में जाता है तो उसे दर्द शुरू हो जाता है या किसी को मासिक धर्म के दौरान या नींद नहीं आने से या ज्यादा सोने से यह दर्द होने लगता है। इसके अलावा खाद्य पदार्थों में मौजूद कोई तत्व इस रोग का कारक बन जाता है। इलाज के लिए इन कारकों की पहचान एवं उनसे परहेज जरूरी है। फिर यह देखना चाहिए कि इसकी बारंबारता कितनी है। अगर यह महीने में एक बार होता है

इसके तीव्र होने की स्थिति में किसी भी दर्दनाशक से इसका निदान संभव है। लेकिन अगर महीने में 3 या अधिक बार माइग्रेन का अटैक हो तो 3 या 6 महीने की दवा लगातार खानी पड़ती है और माइग्रेन से छुटकारा मिल जाता है। योग माइग्रेन में काफी राहत देता है। लेकिन यह जरूरी है कि योग सही विधि से किया जाए। कुछ आयुर्वेदिक डॉक्टर माइग्रेन में स्टेरॉयड युक्त दवा देते हैं। ये दवाइयां शरीर के लिए घातक सिद्ध होती हैं।

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