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सूर्य की किरणों से दूरी बना रही है बीमार

एक ऐसे देश में जहां भगवान भुवन भास्कर यानी सूर्य की रोशनी वरदान की तरह लोगों को उपलब्‍ध है वहां इस रोशनी से प्राप्त होने वाले विटामिन की कमी को विडंबना ही कहा जा सकता है। एक अध्ययन के अनुसार देश की करीब 70 फीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से ग्रस्त है जबकि करीब 15 फीसदी और आबादी में यह विटामिन उस स्तर पर नहीं है जितना होना चाहिए। यानी अगर ये कहा जाए कि विटामिन डी की कमी महामारी के स्तर पर है तो गलत नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों में विटामिन डी की कमी होना इसलिए चिंता की बात है क्योंकि यह कोई सामान्य विटामिन नहीं बल्कि एक स्टेरायड हार्मोन है जो कि शरीर की हर कोशिका पर असर डालता है।

शरीर में कैल्सियम अवशोषित हो इसके लिए यह विटामिन अनिवार्य है और कैल्सियम शरीर की हड्डियों के लिए कितना जरूरी है ये किसी को बताने की जरूरत तो नहीं ही है। यानी दूसरे शब्दों में कहा जाए तो विटामिन डी की कमी सीधे-सीधे शरीर की हड्डियों को कमजोर बना देता है। विटामिन डी शरीर के लिए जरूरी सबसे महत्वपूर्ण विटामिन है। सूर्य की रोशनी की कमी न सिर्फ यह विटामिन शरीर में घटा देती है बल्कि शरीर को मौसमी बीमारी से जकड़ देती है। खासकर मॉनसून में जब सूर्य अधिकांश समय बादलों में छिपा रहता है तब ये समस्या ज्यादा होती है। इसलिए इस मौसम में शरीर ढीला और आलसी सा महसूस होता रहता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मानद महासचिव डॉक्टर आर.एन. टंडन कहते हैं कि लोग आज तेज रफ्तार, तनावपूर्ण और अस्वास्‍थ्यकर जीवन जी रहे हैं। काम के घंटे लंबे होते जा रहे हैं जिसके कारण घर से बाहर उनका जो समय पार्कों और जॉगिंग ट्रैक पर बीतना चाहिये वो या तो नींद पूरी करने या टीवी-मोबाइल पर चला जाता है।

विटामिन डी की कमी का यह सबसे बड़ा कारण बन गया है। लोगों को यह समझना चाहिए कि विटामिन डी सिर्फ हड्डियों ही नहीं हृदय, मस्तिष्क, रोग प्रतिरोधी क्षमता तथा अन्य कई चीजों के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी लोगों को रिकट्स, ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर तथा अन्य कई तरह के संक्रमण का शिकार बना सकती है। अभी तक यह माना जाता था कि खुले बदन 15 से 30 मिनट तक रोज धूप सेंकने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की प्राप्ति हो जाती है मगर ऑस्टियोपोरोसिस इंटरनेशनल और ब्रिटीश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार गर्मियों और सर्दियों में यदि लगातार 30-30 दिन तक रोज 30 मिनट तक धूप सेंका जाए तब भी शरीर को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता है। ऐसे में विटामिन डी सप्लीमेंट की जरूरत पड़ती है। इस विटामिन की कमी यूं तो हर उम्र और वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है मगर महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं क्योंकि प्रजनन और बच्चे को स्तनपान कराने जैसी वजहों के कारण उनके शरीर में कैल्सियम का तेज क्षरण होता है। ऐसी महिलाओं को विटामिन डी की खुराक जरूर दी जानी चाहिए क्योंकि इससे उनके साथ-साथ बच्चे को भी फायदा होगा। इस बारे में आईएमए के अध्यक्ष डॉक्टर के.के. अग्रवाल कहते हैं कि लोगों को यह समझना होगा कि विटामिन डी दो तरह का होता है।

एक विटामिन डी2 या एर्गोकैल्सीफेरोल जो कि भोज्य पदार्थों के जरिये पाया जाता है जबकि दूसरा डी 3 जो कि सूर्य की रोशनी की मदद से शरीर खुद पैदा करता है। दोनों ही शरीर के लिए एक समान महत्वपूर्ण हैं। यदि हम भोजन की मदद से पर्याप्त डी2 लेते हैं तो हमारा शरीर बहुत थोड़ी धूप में भी पर्याप्त डी3 बना लेता है। कहां से मिलता है विटामिन डी कॉड लीवर तेलः कॉड मछली के लीवर से यह तेल मिलता है और इसे बेहद स्वास्‍थ्यकर माना जाता है। इसे कैप्‍शूल या तेल के रूप में लिया जा सकता है। यह जोड़ों के दर्द में बहुत आराम देता है। मशरूमः यह विटामिन डी3 का बढ़िया स्रोत होने के साथ-साथ लो कैलोरी डायट भी है। ऐसे में अपना वजन घटाने के इच्छुक लोगों के लिए यह अतिरिक्त फायदेमंद है । सूरजमुखीः सूरजमुखी के बीज न सिर्फ विटामिन डी3 देते हैँ बल्कि यह प्रोटीन का भी बढ़िया स्रोत है।

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