Times Bull
News in Hindi

बजट में सेहत पर कितने मेहरबान होंगे जेटली

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति जारी करते हुए यह वादा किया था कि सरकार स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में देश के कुल सकल उत्‍पाद के 1.5 फीसदी खर्च को 2025 तक बढ़ाकर 2.5 फीसदी कर देगी
एक फरवरी को अरुण जेटली देश का बजट संसद के सामने रखने जा रहे हैं। एक बार फिर ये सवाल उठ खड़ा हुआ है क‍ि क्‍या वित्‍त मंत्री इस बार देश में स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र के बजट में उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी करेंगे या इस बार भी हर बार जैसा ही हाल होगा। गौरतलब है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार ये दोहराते रहे थे कि चीन अपने सालाना बजट का बड़ा हिस्‍सा शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर खर्च करता है मगर भारत में ऐसा नहीं होता है।सरकार के वादे का क्‍या होगा दुर्भाग्‍य की बात यह है कि भारत में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया है।

भले ही पिछले साल मार्च में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति जारी करते हुए यह वादा किया था कि सरकार स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में देश के कुल सकल उत्‍पाद के 1.5 फीसदी खर्च को 2025 तक बढ़ाकर 2.5 फीसदी कर देगी मगर यह वादा किस हद तक पूरा होगा वो इसी बजट से तय होगा और इससे सरकार की मंशा भी सामने आ जाएगी।स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की मांग इसी सवाल को ध्‍यान में रखते हुए देश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से परिवार नियोजन और गैर-संक्रामक रोगों जैसे क्षेत्रों के लिए और अधिक धन आवंटन तथा स्वास्थ्य बीमा को और अधिक समावेशी बनाने का आग्रह किया है। देश में जनसंख्‍या नियंत्रण जैसे महत्‍वपूर्ण सामाजिक विषय पर कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठन पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा का कहना है कि केंद्र सरकार इस बात को मान चुकी है कि सामाजिक-आर्थिक विकास के लक्ष्य केवल स्वस्थ आबादी की बुनियाद पर प्राप्त किए जा सकते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में भी यह धारणा झलकी है।

उन्‍होंने कहा कि सरकार साल 2025 तक स्वास्थ्य पर खर्च जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर ढाई प्रतिशत करने का वादा कर रखा है। इसके अलावा सरकार ने पिछले साल एक सम्मेलन में जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए तीन अरब डॉलर देकर परिवार नियोजन पर अपने संकल्प को दोहराया है। उन्होंने कहा कि हालांकि पिछले वित्त वर्ष (2016-17) में परिवार नियोजन के लिए केवल 60.7 प्रतिशत धन खर्च किया गया।लक्ष्‍य पूरे होंगे या नहीं इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, बेंगलुरु की निदेशक डॉ. उषा मंजूनाथ ने कहा कि सरकार ने प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों के लिए लघु अवधि और दीर्घ अवधि लक्ष्य तय किए थे और मातृ मृत्यु दर को 2018-2020 तक कम करके 100 पर लाने और शिशु मृत्यु दर को 2019 तक 28 पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को समयबद्ध तरीके से बढ़ाकर जीडीपी का ढाई प्रतिशत करने का वादा किया गया है। डॉ मंजूनाथ ने कहा कि यह अच्छा कदम है लेकिन जमीनी कार्रवाई तथा बजट के आवंटन के साथ उसकी उपयोगिता को योजनाबद्ध तरीके से बनाकर लागू किया जाना चाहिए। की वर्ड्स: बजट, सेहत, खर्च, जे पी नड्डा, पूनम मुटरेजा,

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.