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बीमारियों से निपटने के लिए बारिश के मौसम में ‘ड्रैगनफ्लाई’ को बढ़ावा देने की पहल

बारिश का मौसम परवान चढ़ने के साथ दिल्‍ली एनसीआर में लोगों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्‍छर जनित बीमारियों का डर भी सिर पर चढ़ जाता है। यूं तो इस वर्ष अब तक इन बीमारियों का कोई गंभीर प्रभाव देखने को नहीं मिला है मगर कब ये बीमारियां तेजी से पैर पसार लें कहा नहीं जा सकता। ऐसे में दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में मलेरिया और डेंगू सहित अन्य मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए बारिश के मौसम में पनपने वाले कीट ‘ड्रैगनफ्लाई’ को बढ़ावा देने की पहल की गयी है। पर्यावरण संरक्षण संबंधी अंतरराष्ट्रीय संगठन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की भारत इकाई और बॉम्‍बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की ओर से दिल्ली में ड्रेगनफ्लाई के पर्यावास के विस्तार के लिए अभियान शुरु किया गया है। अभियान के संयोजक और बीएनएचएस की दिल्ली इकाई के प्रमुख सुहेल मदान ने बताया कि दिल्ली के 11 वन्य जीव अभ्यारण्य और जैव विविधता उद्यानों में तीन अगस्त से शुरु की गयी मुहिम के शुरुआती दौर में ड्रेगनफ्लाई की विभिन्न प्रजातियों की पहचान की गयी है।

मदान ने बताया कि दिल्ली में ड्रेगनफ्लाई की अधिकता वाले अरावली, नीला हौज और यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क, असोला भाटी वनक्षेत्र, ओखला पक्षी विहार, लोदी गार्डन, संजय वन झील, धनौरी झील, सूरजपुर झील, नजफगढ़ झील तथा बसई झील में दो सप्ताह तक चले अभियान में ड्रेगनफ्लाई की 17 प्रजातियों की पहचान की गयी है। दिल्ली के जैव पर्यावास संबंधी दस्तावेजी आंकड़ों के मुताबिक इस क्षेत्र में ड्रेगनफ्लाई की 51 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज है। उन्होंने बताया कि जलाशयों में पनपने वाले मच्छरों के लार्वा को ड्रेगनफ्लाई खाकर मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करता है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्राकृतिक संतुलन पिछले कुछ दशकों में विकासकार्यों और अवैध कब्जों की भेंट चढ़े जलाशयों के नष्ट होने के कारण बिगड़ गया। नतीजतन ड्रेगनफ्लाई की अधिकांश प्रजातियां न सिर्फ दिल्ली से दूर हो गयीं साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने से मलेरिया और डेंगू का प्रसार हुआ। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के प्रमुख कौस्तुभ श्रीकांत ने बताया कि ड्रेगनफ्लाई की उपयोगिता को देखते हुये दिल्ली में ड्रेगनफ्लाई महोत्सव की 2015 में शुरुआत की गयी।

हर साल बारिश के मौसम में एक महीने तक चलने वाले इस महोत्सव में ड्रेगनफ्लाई के संरक्षण और बढ़ोतरी का अभियान चलाया जाता है। मदान ने बताया कि इस साल तीन अगस्त से एक सितंबर तक चलने वाले महोत्सव में दिल्ली के सात विश्वविद्यालय और 15 स्कूलों के 2000 छात्रों की 11 टीमों ने विशेषज्ञों की अगुवाई में ड्रेगनफ्लाई की पहचान की गयी। अकेले असोला भाटी वन क्षेत्र में ड्रेगनफ्लाई की दस प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गयी। उन्होंने बताया कि एक सितंबर को सभी 11 जैव उद्यानों में किये गये सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े जारी किए जाएंगे। इसमें ड्रेगनफ्लाई की प्रजातियों के प्रसार और मच्छरों की ब्रीडिंग पर पड़ने वाले नकारात्मक असर का भी अध्ययन किया जा रहा है।

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