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अस्‍पताल ने सिर्फ ग्‍लब्‍स का बिल थमाया 11 हजार रुपये

दिल्ली के निजी अस्पतालों में एक बड़ा गोरखधंधा सामने आया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने दिल्ली के 4 बड़े निजी अस्पतालों में मरीजों से अनाप-शनाप बिल वसूलने को लेकर बड़ा खुलासा किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण ने कहा है कि इन अस्पतालों में मरीजों से डेढ़ रुपए के ग्लब्स के लिए 28 सौ रुपये तक वसूल किए गए। दरअसल पिछले महीने 4 मरीजों ने दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों पर ज्यादा बिल वसूलने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।एनपीपीए ने की जांच इन शिकायतों की जांच राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) को सौंपी गई थी। प्राधिकरण ने अपनी जांच में पाया कि इन अस्पतालों ने वास्तव में वास्तविक लागत से सैकड़ों गुना ज्यादा मूल्य मरीजों से वसूल किया। इन 4 अस्पतालों में से सिर्फ फोर्टिस अस्पताल का नाम प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में लिया है बाकी 3 अस्पतालों का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण ने बताया कि अस्पतालों ने जो ग्लब्स एक रुपये में खरीदा उसे मरीजों को 28 सो रुपए में बेचा। इस रिपोर्ट के अनुसार इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली बहुत सरल है। चूंकि यह अस्पताल मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों से बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं

इसलिए यह इन कंपनियों पर दबाव डालते हैं कि वह अपने सामान का अधिकतम खुदरा मूल्य ज्यादा करके लिखें। यानी जो सामान बाहर 1 रुपये का मिल रहा है वही सामान इन अस्पतालों की दुकानों में कई गुना ज्‍यादा एमआरपी पर बेचा जाता है।कंपनियों पर बेजा दबाव अपना सामान बेचने की मजबूरी में यह कंपनियां अस्पतालों के दबाव को मान लेती है। दूसरी ओर यह अस्पताल मरीजों को मजबूर करते हैं कि वह अस्पताल की दवा दुकान से ही सारा सामान खरीदें। उन्हें बाहर से सामान खरीदने की इजाजत नहीं दी जाती। इस प्रकार मरीज फंस जाते हैं। प्राधिकरण ने 20 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह अस्पताल इस गोरखधंधे से मरीजों से हजारों गुना ज्यादा बिल वसूल रहे हैं।59 लाख वसूलने की सिफारिश प्राधिकरण ने स्वास्थ्य मंत्रालय से सिफारिश की है कि इन चारों अस्पतालों से मरीजों से वसूला गया 69 लाख रुपया वसूल किया जाए। स्वास्थ्य मंत्रालय इस पर क्या कार्यवाही करेगा यह देखने की बात है।चर्चा में है अस्‍पतालों की मनमानी गौरतलब है कि दिल्ली में हाल के दिनों में मरीजों से अनाप-शनाप बिल वसूलने की शिकायतें आम हो गई है। पिछले दिनों गुड़गांव में फोर्टिस अस्पताल पर आरोप लगा था कि डेंगू से पीड़ित एक बच्ची के इलाज के लिए लिए अस्पताल ने बच्ची के पिता से करीब 17 लाख रूपये वसूल किए। बाद में जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया तब अस्पताल ने बच्ची के पिता को पैसे वापस करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि बच्ची के पिता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। डेंगू से पीड़ित उस बच्ची की अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में हरियाणा सरकार अभी फोर्टिस गुड़गांव की जांच कर रही है। इसके अलावा भी कई अस्पतालों पर मरीजों से अलग-अलग नाम पर ज्यादा बिल वसूलने के आरोप लगे हैं।

प्राधिकरण ने स्वास्थ्य मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें उदाहरण देकर बताया गया है कि यह अस्पताल मरीजों को किस प्रकार ठग रहे हैं। एड्रेनार के 2 एमएल के इंजेक्शन की खरीद कीमत अस्पताल को महज 14 रुपये 70 पैसे पड़ती है जबकि इस पर एमआरपी 189 रुपये 95 पैसे है। इसके बावजूद अस्पताल इस इंजेक्शन को मरीज को 5318 रुपये में बेचते हैं।ऑपरेशन के दौरान 1200 ग्‍लब्‍स का इस्‍तेमाल दिखाया अस्पताल किस प्रकार लूट मचाए हुए हैं इसका एक और उदाहरण दिया गया है। एक अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान 12 सौ ग्‍लब्‍स खराब होने की बात कहते हुए मरीज को सिर्फ ग्‍लब्‍ज के मद में 11400 रुपये का बिल थमा दिया गया। यह बिल तब था जबकि अस्पताल ने ग्लब्स की कीमत सिर्फ 9 रुपये 50 पैसे प्रति ग्‍लब्‍स लगाई। रिपोर्ट के अनुसार सिरिंज व दवाओं पर भी इन मरीजों से 600 से 12 सौ फ़ीसदी तक मुनाफा वसूला गया। जाहिर है बिना किसी निगरानी के अस्पताल मरीजों पर कहर ढा रहे हैं और उनके खिलाफ अब तक तो कोई बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। उम्मीद है इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय की नींद खुलेगी और इन अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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