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लो सोडियम नमक कहीं शरीर पर भारी न पड़ जाए

आजकल टीवी विज्ञापनों में लो सोडियम नमक के प्रचार का बोलबाला है। ऐसे लोग जिन्‍हें हाइपरटेंशन यानी उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या है उनके टार्गेट करके कई कंपनियों ने कम सोडियम वाला नमक बाजार में उतारा है और जमकर इसका प्रचार भी किया जा रहा है और लोग इस प्रचार के झांसे में आकर इस नमक का इस्‍तेमाल करने भी लगे हैं। यदि आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं तो सावधान हो जाएं क्‍योंकि ये नमक भले ही आपके ब्‍लड प्रेशर में लाभ पहुंचाए मगर शरीर में कुछ गंभीर परेशानियां पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि लो सोडियम के नाम पर बेचे जा रहे नमक में पोटैशियम की मात्रा सामान्‍य से ज्‍यादा होती है और ज्‍यादा पो‍टैशियम का सेवन करने से खून में इसकी मात्रा बढ़ जाती है जिसे हायपरकेलेमिया कहते हैं। इस बीमारी के लक्षणों में धीमी पल्‍स, धीमी हृदयगति और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल है।

 

इंस्‍टीट्यूट ऑफ लीवर एवं बायलियरी साइंस के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्‍टर आर पी माथुर के अनुसार उनके पास अक्‍सर ऐसे मरीज आते हैं जिन्‍होंने बिना अपने डॉक्‍टर की सलाह लिए लो सोडियम नमक लेना शुरू कर दिया और इसके कारण उन्‍हें गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके कारण कई बार ऐसे मरीजो को डायलिसिस या हार्ट पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ जाती है। डॉक्‍टर माथुर ने कहा कि बिना डॉक्‍टर की सलाह लिए कोई भी विशेष नमक खाने की जरूरत नहीं है। दिल्‍ली के के बीएल कपूर सुपर स्‍पेशियलिटी हॉस्‍पीटल में कुछ साल पहले एक महिला कांपते हाथों की शिकायत लेकर पहुंची। महिला टाइप 2 डायबिटीज, उच्‍च रक्‍तचाप और डायबेटिक नेफ्रोपैथी की मरीज थी मगर उसके सभी अंग सही तरीके से काम कर रहे थे और स्थिति सामान्‍य थी।

 

सामान्‍य जांच के दौरान पता चला कि महिला हायपरके‍लेमिया की शिकार है। डॉक्‍टर ने दस्‍तावेजी जांच के दौरान पाया कि उसकी कोइ दवा हाल में नहीं बदली गई है यानी दवाओं के कारण ये समस्‍या नहीं हुई हो सकती थी। इसके बाद जब महिला से उसके खान पान के बारे में जानकारी जुटाई गई तब पता चला कि उसने हाल ही में अपना नमक बदला है और लो सोडियम नमक खाने लगी है। इसके बाद डॉक्‍टरों ने एंटी हायपरकेलेमिया इलाज किया और तब वो महिला ठीक हुई। देश के जाने माने डायबेटोलॉजिस्‍ट और फोर्टिस सी डॉक अस्‍पताल के चेयरमैन डॉक्‍टर अनूप मिश्रा ने कहा कि अपने मरीजों को सही डाइट की सलाह देना उनका काम है मगर वो किसी मरीज को लो सोडियम नमक खाने की सलाह नहीं देते। उनका साफ कहना है कि रक्‍तचाप के मरीजों को वो ये सलाह देते हैं कि खाने में नमक कम करें न कि लो सोडियम नमक इस्‍तेमाल करें। मरीज विज्ञापनों के झांसे में न आएं।

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