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गठिया को न करें नजरअंदाज

गठिया या अंग्रेजी में कहें तो आर्थराटिस एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में यह भ्रम है कि यह सिर्फ बड़ी उम्र के लोगों को होता है। कुछ हद तक यह बात सही है मगर गठिया का एक प्रकार ऐसा भी है जो किसी भी उम्र के व्‍यक्ति को अपनी चपेट में लेता है। एम्स के पूर्व निदेशक और देश के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.के. दवे कहते हैं कि आम भाषा में गठिया कहे जाने वाले आर्थराइटिस के अंतर्गत दो तरह की समस्याएं आती हैं। पहली वह जिसमें शरीर के सारे जोड़ों में दर्द होता है। इसे रूमेटिड आर्थराटिस के नाम से जाना जाता है। यह सभी उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लेता है। इसके लिए एलोपैथी में अलग-अलग तरह की कई प्रभावी दवाइयां हैं। दूसरी समस्या हड्डी के जोड़ों में सूजन की होती है। इसे ऑस्टियो आर्थराइटिस कहते है। यह उम्र से जुड़ा रोग है जो प्रायः 50-60 वर्ष की उम्र मे होता है।

यह रोग रीढ़, घुटनों, गर्दन आदि को चपेट में लेता है। एलोपैथी में व्यायाम के साथ-साथ दर्द निवारक सहित अन्य दवाओं, बिजली के सेक या जोड़ को धोकर इसका प्रभावी इलाज होता है। अब इसके लिए बाजार में ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो उपास्थि का भी बचाव करती हैं। लेकिन घुटने में इस बीमारी की उपेक्षा करना खतरनाक हो सकता है। घुटने की कटोरियां बदलने की तकनीक या कहें नी रीप्‍लेसमेंट टेक्‍नीक तो अब देश के बड़े शहरों में धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल की जा रही है। सवाल ये है कि गठिया के इलाज में योग या अन्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों की कितनी उपयोगिता है। डॉक्‍टर दवे कहते हैं कि इस बीमारी में योग के फायदों को डॉक्‍टर भी मानते हैं मगर यह नहीं मानते कि योग हर मर्ज की दवा है।

गठिया की बात करें तो अगर रीढ़ की हड्डी में दर्द हो तो सबसे पहले तो यह देखना होगा कि किस वजह से दर्द हो रहा है। हो सकता है कि रीढ़ में टीबी या कैंसर हो। ऐसे में आंख मूंद कर योग करेंगे तो लकवा मार सकता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में होम्‍योपैथी के सहायक प्रोफेसर आलोक रंजन कहते हैं कि होम्योपैथी में भी गठिया के इलाज के लिए दवाइयों और फीजियोथैरेपी के अलावा योग की सलाह दी जाती है। हालांकि गठिया की दवाइयां मरीज के लक्षणों के अनुसार बदलती हैं। डॉ. अलोक का कहना है कि गठिया में योग काफी फायदेमंद हो सकता है। मगर बगैर उचित मार्गदर्शन के योग का अभ्यास नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि इस स्थिति में बीमारी बिगड़ सकती है। अगर गठिया की गंभीर शिकायत हो तो डॉक्टर की सलाह से फीजियोथैरेपी कराने से फायदा होता है। उनके अनुसार आर्थराइटिस का प्रभावी इलाज होम्योपैथी में मौजूद है मगर इसके लिए किसी प्रामाणिक चिकित्सक की देख-रेख में ही दवाएं लेनी चाहिए।

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