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कोर्ट ने एम्स पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना

एम्‍स ने महज आधारकार्ड स्कैन नहीं होने के कारण एक परीक्षार्थी को परीक्षा देने से वंचित कर दिया था
अभी ज्‍यादा दिन नहीं हुए हैं जब केंद्रीय लोकसेवा आयोग की परीक्षा में महज 5 मिनट की देरी से पहुंचने पर परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं मिलने के कारण दिल्‍ली में एक परीक्षार्थी ने खुदकुशी कर ली थी। परीक्षा में अलग अलग वजहों से परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं देने की घटनाएं नई नहीं हैं। ऐसी ही एक घटना में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पर 50 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। दरअसलल एम्‍स ने महज आधारकार्ड स्कैन नहीं होने के कारण एक परीक्षार्थी को परीक्षा देने से वंचित कर दिया था। कोर्ट ने इस कदम को गलत करार देते हुए यह जुर्माना लगाया है ताकि आगे से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की अदालत ने कहा कि एम्स के परीक्षा नियंत्रक ने अनावश्यक रुप से विद्यार्थी को परीक्षा में शामिल होने से रोक कर बेहद क्रूर रुख अपनाया। प्रवेश परीक्षा केंद्र से किसी विद्यार्थी को लौटा देना, अपूरणीय नुकसान है और इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए।हालांकि अदालत ने यह कहते हुए फिर से परीक्षा का आयोजन करने का आदेश नहीं दिया कि इससे अन्य विद्यार्थियों को बहुत परेशानी होगी जो पहले ही परीक्षा दे चुके हैं। ऐसे विद्यार्थियों पर एक और परीक्षा का बोझ डालना अनुचित होगा।कर्नाटक के एक विद्यार्थी ने अवकाश के दौरान उच्च न्यायालय में अर्जी लगायी थी। उसे 26 मई को एम्स प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था क्योंकि कलबुर्गी में परीक्षा केंद्र पर मोबाइल फोन ऐप के जरिए आधार कार्ड के क्यूआर कोर्ड का सत्यापन कर रहे कर्मचारी उसकी आधार संख्या का सत्यापन नहीं कर पाये थे।

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