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जीने की आदत सुधार कर मष्तिष्‍काघात से बचें

जीवनशैली में बदलाव के जरिये स्‍ट्रोक के 90 फीसदी मामलों को रोका जा सकता है
आंकड़े बताते हैं कि स्‍ट्रोक के सभी मामलों में 15 फीसदी मामले हेमरेज स्‍ट्रोक के होते हैं जिसमें मष्तिष्‍क की कोई रक्‍त वाहिनी फट जाती है और इसके कारण शरीर को स्‍थायी नुकसान हो सकता है। जहां स्‍ट्रोक के सामान्‍य मामलों में मरीजों को इलाज से फायदा होता है वहीं हेमरेज स्‍ट्रोक का कोई खास इलाज नहीं है और इसलिए इसके शिकार मरीजों में से अधिकांश की हेमरेज स्‍ट्रोक के चंद दिनों के अंदर मौत हो जाती है। हेमरेज स्‍ट्रोक उसे कहते हैं जब किसी आर्टरी से खून मष्तिष्‍क के अंदर रिसने लगता है। इस रक्‍तस्राव के प्रेशर से मष्तिष्‍क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्‍त होने लगती हैं और ये क्षतिग्रस्‍त क्षेत्र ठीक से काम करना बंद कर देता है।क्‍या कहते हैं

विशेषज्ञ इस बारे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल कहते हैं कि कमजोर रक्‍त वाहिनी दो तरह की होती है जो हेमरेजिक स्‍ट्रोक का कारण बन सकती है, पहली एन्‍यरिजम यानी धमनी विस्‍फार और दूसरी आर्टिरियोवेनस मालफोर्मेशन (एवीएम्‍स)। एन्‍यरिजम स्थिति का मतलब है रक्‍तवाहिनी के कमजोर हिस्‍से का बलून की तरह फूलना। यदि इसका इलाज न किया जाए तो इसके कारण वो कमजोर हिस्‍सा तबतक कमजोर होता जाता है जबतक वो फट न जाए। इससे खून र‍िसकर ब्रेन में जाने लगता है। दूसरी ओर एवीएम का अर्थ है रक्‍त वाहिनियों का असामान्‍य गठन। इनमें से कोई भी रक्‍त वाहिनी फट सकती है, जिसके कारण ब्रेन में खून रिसकर पहुंचने लगता है।समय महत्‍वपूर्ण है डॉक्‍टर अग्रवाल कहते हैं कि महत्‍वपूर्ण ये है कि जितना जल्‍दी संभव हो स्‍ट्रोक का इलाज शुरू हो जाना चाहिए। शुरुआती घंटे में इलाज मिल जाए तो मरीज के बचने के चांस बढ़ जाते हैं। हेमरेजिक स्‍ट्रोक में सबसे पहले यह पता लगाना होता है कि ब्रेन में कहां से रक्‍त रिस रहा है और फ‍िर इसे कंट्रोल करना होता है।

इसमें ऑपरेशन की जरूरत भी पड़ सकती है। स्‍ट्रोक के पश्‍चात पुनर्वास के तरीकों से लोगों को स्‍ट्रोक के कारण होने वाली अपंगता से उबरने में मदद मिल सकती है।लक्षण स्‍ट्रोक के आम लक्षणों में चेहरे, हाथ या पैर के एक हिस्‍से में अचानक लकवा मार जाना, भ्रम की स्थिति, बोलने में मुश्किल होना, सामने वाले की बात समझने में दिक्‍कत होना, एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी होना, चलने में परेशानी, चक्‍कर आना, खड़े होने में संतुलन न होना और बिना किसी वजह के तेज सिरदर्द होना आदि शामिल हैं।कारण डॉक्‍टर अग्रवाल के अनुसार हेमरेजिक स्‍ट्रोक के दो ज्ञात कारणों में पहला तो अनियंत्रित उच्‍च रक्‍तचाप यानी हाई ब्‍लडप्रेशर है और दूसरा है खून पतला करने वाली दवाओं को अत्‍यधिक इस्‍तेमाल। इन दोनों के अलावा कुछ और चीजों को दुरुस्‍त करना भी जरूरी है। इनमें वजन को कंट्रोल में रखना, शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना, शराब के सेवन को कम करना और नशीली दवाओं से दूर रहना शामिल है। डॉक्‍टर अग्रवाल कहते हैं कि मष्तिष्‍क के किस हिस्‍से में और कितनी देर तक खून की आपूर्ति प्रभावित होती है इससे यह तय होता है कि स्‍ट्रोक से शरीर को कितना नुकसान होगा। कई बार शरीर स्‍थाई रूप से अपंग हो जाता है।टिप्‍स स्‍ट्रोक को रोका जा सकता है। 90 फीसदी स्‍ट्रोक के मामले 10 जोखिम घटकों से जुड़े होते हैं जिन्‍हें ठीक किया जा सकता है।

इसके लिए: हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करना चाहिए, सप्‍ताह में 5 दिन पर्याप्‍त व्‍यायाम करें, खाने में सोडियम कम करें और फल एवं सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं, कोलेस्‍ट्रोल को नियंत्रित करें, स्‍वस्‍थ बॉडी मॉस इंडेक्‍स हासिल करें जिसका अर्थ कि मोटापा कम करें, धूम्रपान छोड़ दें और पैसिव स्‍मोकिंग से भी दूर रहें, शराब का सेवन कम करें, आट्रियल फाइब्रिलेशन की पहचान कर उसका इलाज करवाएं, मधुमेह को नियंत्रित करें और सबसे बढ़कर, स्‍ट्रोक के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएं।

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