जिस समोसे को अपना बताते हैं वो किसी और देश की है अमानत, खबर आपके मतलब की है

समोसा एक ऐसी नमकीन डिश है जिसके बिना शाम की चाय अधूरी मानी जाती है। गर्मागम तले हुए समोसे के दीवानों की संख्या अनगिनत है। बच्चे हो या बूढ़े समोसा हर किसी को पसंद है। आज समोसा शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही रुप में उपलब्ध है। अब सवाल यह आता है कि भारत की सबसे लोकप्रिय डिश समोसे की शुरुआत कब और कहां से हुई?

ऐसा माना जाता है कि समोसे की शुरुआत सबसे पहले ईरान में हुई थी। अब सवाल यह आता है कि समोसे का आकार तिकोना कैसे बना?

इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि, मोहम्मद गजनवी के शाही दरबार में एक नमकीन डिश परोसी जाती थी। इस पकवान को मीट कीमा और सुखा मेवा भरकर बनाया जाता था। 14 वीं शताब्दी में इब्नबतूता भारत आए थे। उस समय वे मोहम्मद तुगलक के दरबार में गए थे जिसका जिक्र करते हुए उन्होंने बाद में कहा कि, दरबार में भोजन के समय मसालेदार मीट, मूंगफली, बादाम भरकर लजीज समोसे का निर्माण किया गया था। 16 वीं शताब्दी में मुगलकालीन आइने अकबरी में भी समोसे का जिक्र मिलता है।

भारत में समोसा करीब 2000 साल पहले आया था। उस दौरान आर्य भारत आए थे। मध्य एशिया की पहाड़ियों से गुजरते हुए समोसा भारत पहुंचा था। भारत में आने के बाद इसमें कई तरह के बदलाव किए गए। आज समोसे में आलू का मसाला भरा जाता है। कहा जाता है कि सोलहवीं सदी में पुर्तगाली जब भारत आए थे तब वे आलू लेकर आए थे। लोगों का कहना है कि, उसी समय से समोसे में आलू भरा जाने लगा।

आज समोसे को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे गुजराती में सुमोस, बंगाली में सिंगाड़ा, फारसी में सम्बुसक,ईरान में सन्बुसे, तुर्की और मध्य एशिया में समसा इत्यादि।खैर नाम चाहे जो भी, लेकिन इसके स्वाद के कायल लोग सदियों से रहे हैं और आज भी इसके बिना शाम के नाश्ते का गुजारा नहीं होता और आने वाले सालों में भ्ज्ञी इसका रुतबा बरकरार रहेगा।

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