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EMI के नाम पर चल रहे सैकड़ों गौरखधंधे, इन तरीकों से बचें

100 रुपए लगाएं, कुछ ही दिनों में 500 ले जाएं…, कुछ हजार का निवेश करें और लखपति बन जाएं…, फोटो पहचानें और कार ले जाएं…, ऐसे ना जाने कितने लुभावने वाक्यों से फर्जी कम्पनियां भोले-भाले लोगों को उल्लू बनाकर ठगी कर जाते हैं। पर फिर भी नए-नए लोग ऐसे फर्जी ऑफर्स का शिकार हो जाते हैं। हाल ही में फ्री ईएमआई पर कार का मालिक बनने का सपना दिखाकर एक कम्पनी ने करोड़ो का फर्जीवाड़ा किया। आगरा में इस कम्पनी ने फ्री ईएमआई का लालच दिया और जीपीएस सिस्टम लगाने के नाम पर 31000 रुपए जमा कर लिए। इस तरह से सैकड़ों लोगों को लोन के जरिए नई कार दिलवाई और जीपीएस के नाम पर लिए करोड़ो रुपए डकार कर कम्पनी रफूचक्कर हो गई। ठगे हुए लोगों के गले अब कार की भारी-भरकम ईएमआई तो पड़ ही गई है, 31000 रुपए डूब गए सो अलग।

लुभावने ऑफर्स देखते ही आपके कान खड़े हो जाने चाहिए। अगर आपको कम्पनी का ऑफर रियल और तार्किक लगता हो, तो सबसे पहले उस कम्पनी का क्रॉस वेरिफिकेशन करें। यानि कि पहले कम्पनी का रजिस्ट्रेशन नंबर वेरिफाई करें। कम्पनी किस संस्था या मालिकाना कम्पनी से संबंधित है। जहां से वह खुद को संबंधित बता रही है, वहां उसका रजिस्ट्रेशन दर्ज है कि नहीं। साथ ही कम्पनी अधिकारियों की डिटेल जुटाएं। अगर आपको इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिल रही है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है।

अक्सर देखा जाता है कि नामी कम्पनी के नाम में मामूली छेडख़ानी कर लोगों को बेवकूफ बनाया जात है और लूटा जाता है। मसलन टाटा एक बड़ी वाहन निर्माता कम्पनी है। फर्ज कीजिए की टाटा के नाम पर कोई फर्जी कम्पनी खोल लेता है और लुभावना ऑफर देता है, तो कैसे पता चले कि ऑफर फ्रॉड है या रियल। इसके लिए आपको सिर्फ एक काम करना है। सबसे पहले सीधे कम्पनी के मुख्यालय में फोन से बात करें या फिर संभव हो तो व्यक्तिश जाकर मिलें। संक्षेप में नाम से प्रभावित ना हों जब तक कि वह कम्पनी और ऑफर आपके तथ्यमय जांच में खरी नहीं उतरे।

फर्जीवाड़ा करने वाली ज्यादातर कम्पनियां अपने प्लान को लागू करने से पहले ही फर्जी वेबसाइट भी बना लेती हैं। उनके ऑफर्स के बारे में पूछताछ करने वालों को ये लोग वेबसाइट पर जानकारी चैक कर विश्वास करने की सलाह देते हैं। बहुत से भोले-भाले लोग वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर संतुष्टि कर लेते हैं। पर क्या वाकई वेबसाइट असली कम्पनी होने का सबूत है? जी, नहीं, बिल्कुल नहीं! आपको वेबसाइट की डिटेल्स को भी संबंधित स्थानीय कार्यालय में वेरिफाई करना चाहिए। आपको बता दें कि अब वेबसाइट बनाना बेहद आसान है। वेबसाइट आप और हम भी बना सकते हैं।

आपने बहुत से लोगों को यह कहते सुना होगा कि अब कम्प्यूटर का जमाना है, इंटरनेट का जमाना है, इसमें कागज की क्या जरूरत है। लेकिन आपको बता दें कि बिना आधिकारिक कागज देखे, कतई विश्वास ना करें। हालांकि कागज में भी फर्जीवाड़ा किया जाता है, लेकिन ये आपके पास एक प्रमाण की तरह रहता है। कागज का मतलब जो भी कम्पनी दे वह नहीं है। यहां कागज का मतलब है कि उस डॉक्यूमेंट में सही और आधिकारिक जानकारी है या नहीं।

हर फर्जी कम्पनी, ऑफर की नींव इंसान की लालची प्रवृति पर टिकी होती है। जो लोग लालच करते हैं और शॉर्टकट रास्ते तलाशते हैं, ऐसे ही लोग फर्जी कम्पनियों का निशाना होते हैं। ऐसा नहीं है कि पैसा कमाने के बारे में सोचना गलत है, लेकिन जो तरीका है वह कितना सही है, यह भी देखा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए एक बार 1000 रुपए लगाइए और जिंदगी भर लाखों पाने का ऑफर समझ से बाहर है। लेकिन लोग इतनी जल्दी लालच के जाल में फंस जाते हैं कि वे यह भी नहीं देखते कि ऑफर देने वाली कम्पनी की सच्चाई क्या है।

पुरानी कहावत है कि बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए। अधिकांश लोग इस कहावत को जानते हैं, उदाहरण देते हैं, लेकिन जब वाकई इसे काम लेने का समय आता है, तो उन्हें यह याद भी नहीं रहती। लुभावने ऑफर्स पर बात करते हुए लोग सबसे पहले कमाई पाने और मौका छूट ना जाए कि सोच के चलते तुरंत हां कर देते हैं। वे लोग कम्पनी के बारे में जानकारी जुटाना भी उचित नहीं समझते हैं। और यही गलती बाद में भारी पड़ती है।

फर्जी कम्पनियों का अब तक का रिकार्ड रहा है कि वे सबसे पहले ग्राहक का विश्वास जीतने के लिए कुछ लोगों को वादे के अनुसार कुछ समय तक लाभ देती है। इससे बाकी लोगों का विश्वाास बढ़ जाता है। इसी बीच कम्पनियां किसी विशेष प्रोडक्ट, सेवा, फाइल चार्ज इत्यादि के नाम पर होने वाले लाभ से बेहद कम पैसा आपसे मांगती है। ऐसे में ग्राहक को लगता है कि जब कम्पनी लाखों का फायदा दे रही है, तो थोड़ से पैसे हम दे दें तो क्या फर्क पड़ेंगा। चाहे वह चार्ज नाजायज ही क्यों ना हो। पर आपको बता दें कि अगर 5 लाख की कमाई का सपना दिखाकर अगर फर्जी कम्पनी 10,000 रुपए भी आपसे ले ले और ऐसे ही 1000 लोगों से ये पैसा ले, तो यह रकम 1 करोड़ रुपए हो जाती है। यही कम्पपनी का लक्ष्य भी होता है।

हम यहां आपको सबसे पहले एक उदाहरण पेश कर रहे हैं फिर बताएंगे कैसे है यह धोखाधड़ी-

एक कम्पनी ने एक नामी फर्म के नाम से एक व्यक्ति को फोन किया। फोन मोबाइल से किया जाता है। कम्पनी का प्रतिनिधि पूछता है कि क्या आपको जीरो प्रसेंट पर 1 लाख रुपए का लोन चाहिए। प्रतिनिधि इस ऑफर की और डिटेल बताता है। फिलहाल आपको मात्र 10,000 रुपए देने हैं। इस पैसे से आपको एक जीवन बीमा पॉलिसी दी जाएगी। जैसे ही यह रकम जमा होगी आपको 1 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इसके बाद आपको 10 साल तक हर साल 10,000 रुपए जमा करवाने हैं। ऐसे आपका लोन चुक जाएगा और ब्याज के नाम पर 1 रुपया भी नहीं देना है। इसके साथ आपको बीमा पॉलिसी भी मिल रही है।

जानिए कैसे है यह धोखाधड़ी

सबसे पहली बात कोई भी निजी कम्पनी बिना लाभ कमाए नहीं चल सकती है। जब बिना ब्याज लोन दिया जा रहा है, तो बीमा करने की क्या जरूरत है। अगर सबकुछ सही है, तो बीमा का लाभ कब, कैसे, कितना और किसे मिलेगा। यह कम्पनी बीमा अवधि पूरी होने से पहले ही मैच्योरिटी की तरह एडवांस में रकम क्यों दे रही है। ये ही सवाल हैं जिनका सीधा जवाब है कुछ चक्कर है।

असल में ऐसे ऑफर्स आजकल हर आदमी के पास आ रहे हैं। वाकई में ये असली कम्पनियों की फ्रेंचाइज हैं जिनको बीमा पॉलिसी करने का टॉरगेट दिया हुआ है। टॉरगेट पूरा करने के लिए ऐसे हथकड़े कुछ कम्पनियां काम में लेती हैं। हालांकि ऐसी फर्मों की भी कमी नहीं है जो ना बीमा देती हैं और ना ही लोन की रकम। बस आपसे पहली किस्त ली और रफूचक्कर। इस संबंध में जब असली कम्पनियों से बात की जाती है, तो वे साफ कहती हैं कि हमारा ऐसा कोई ऑफर नहीं है। हमारे नाम पर अगर ऐसा कोई कर रहा है, तो आप सावधान रहें।

आए दिन नौकरी के नाम पर ठगी के मामले आपने सुने होंगे। जिनमें नौकरी दिलवाने की एवज में मोटा पैसा लिया जाता है और बाद में कम्पनी गायब हो जाती है। हम आपको बताते हैं अब कैसे नए ढंग से ठगा जा रहा है बेरोजगारों को। एक कम्पनी का पहले मेल आता है फिर फोन। विदेश में नौकरी देने के नाम पर वो सब किया जाता है जो एक असली कम्पनी में होता है। पहले इंटरव्यू, फिर कागजों का लेन-देन। कम्पनी अपनी तरफ से वीजा फीस, विमान किराया इत्यादि का खर्चा खुद उठाने का लिखित में वादा करती है। विदेश में मिलने वाली सुविधाओं और घर वापसी के लिए पैसा और छुट्टियों के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। अब आता है वीजा बनवाने का नंबर। कम्पनी उम्मीदवार को वीजा की डिटेल मेल करती है और कहती है कि अब आपको सिर्फ 10,000 रुपए की पर्ची कटवाकर वापस हमें भेजनी है। ये रहे बैंक अकाउंट नंबर और नाम। उम्मीदवार विदेश में नौकरी और मोटी कमाई के चक्कर में 10,000 रुपए उस बैंक अकाउंट में भेज देता है। इसके बाद ना कम्पनी वाले फोन उठाते हैं और ना ही कोई मेल आता है। मतलब हो गया फर्जीवाड़ा।

पैसे देने से पहले सोचें तो सही

जो कम्पनी आपका वीजा बनवा रही है, विमान यात्रा का खर्चा खुद दे रही है और अन्य सुविधाएं आपको नौकरी के दौरान देगी, वह कम्पनी आपसे महज 10,000 रुपए क्यों मांगेगी। क्या केवल यही रकम कम्पनी के लिए ज्यादा भारी है जब वह करीब 1 से 1.50 लाख रुपए आपको जॉब देने के लिए खर्च कर रही है।

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