Times Bull
News in Hindi

जीएसटी : घर खरीदने जा रहे हैं तो जान लें ये जरूरी बातें

देशभर में जीएसटी लगने से काफी कुछ बदल गया है। जहां कुछ चीजों के दाम कम हुए हैं, वहीं कुछ के बढ़ भी गए हैं। इस बीच जीएसटी में प्रॉपर्टी को लेकर बहुत सारे कनफ्यूजंस हैं। जीएसटी काउंसिल ने अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए 18 फीसदी जीएसटी की दर तय की है, जिसमें भूमि की लागत को छोड़कर अचल संपत्ति क्षेत्र के लिए पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट शामिल है। हम आपको प्रॉपर्टी सेक्टर के ऊपर जीएसटी के तहत लगाए गए तमाम नियमों के बारे में बता रहे हैं।

1. 18 फीसदी टैक्स

सरकार के संशोधित आदेश के तहत अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। इसमें 9 फीसदी का स्टेट जीएसटी और 9 फीसदी सेंट्रल जीएसटी होगा। सरकार ने डेवलपर की ओर से चार्ज की गई कुल राशि के लिए एक तिहाई के बराबर भूमि मूल्य की कटौती की अनुमति दी है। इस हिसाब से प्रभावी दर 12 फीसदी है।

2. स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज

जीएसटी के दायरे से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को बार ह रखा गया है। ये कर स्टेट की ओर से वसूले जाने वाले कर हैं और प्रॉपर्टी टैक्स भी एक म्युनिसिपल लेवी है।

3. नहीं भरना होगा डिटेल्ड रिटर्न

राहत भरी खबर यह है कि व्यापारियों को फिलहाल डिटेल रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होगी। इस बार समरी रिटर्न भरने से काम चल जाएगा। सरकार ने शुरुआती महीनों की यह राहत कानून अनुपाल के मोर्चे पर चुनौती को देखते हुए दी है।

4. शुरुआती मुद्दे अनिवार्य

हाइन्स इंडिया की डायरेक्टर (फाइनेंस) टीना रॉक्यान ने बताया – शुरुआती मुद्दे, मुद्रास्फीति के दबाव और कुछ अल्पावधि प्रतिकूल प्रभाव पहले 12-15 महीनों में अनुपालन को मुश्किल बनाते हैं, लेकिन वैश्चिक लिहाजस से जीएसटी लाभकारी रहा है।

5. कराधान संबंधी मुद्दों का आसान निवारण

जीएसटी से कुछ मामलों को निपटाना आसान हो जाएगा, क्योंकि सेवाओं और लेवी के मामले पर केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई असमंजस नहीं रहेगी।

6. ट्रांजिशन पीरियड

ट्रांजिशन पीरियड में अचल संपत्ति लेनदेन करने से आईटीसी की गणना कैसे की जाएगी, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। 1 जुलाई के बाद अगर एक इकाई के िलए एक चालान तैयार किया जाना है, तो इसकी गणना कैसे होगी? अगर कोई ग्राहक 1 जुलाई को अचल संपत्ति खरीदना चाहता है, तो मुझे उसे क्या कहना चाहिए? क्या मैं उसे ये बताऊं कि मैं अपनी अचल संपत्ति बेच रहा हूं, लेकिन वास्तविक कीमत तीन से छह महीने बाद दिखई जाएगी, जब मैं आना आईटीसी विवरण प्राप्त करूंगा।

7. गैर-पंजीकृत विक्रेता

पंजीकृत व्यापारी होने की सूरत में करों का भुगतान करने की देनदारी वस्तुओं और सेवाओं के प्रदाता से रिसीवर तक स्थानांतरित कर दी गई है। ऐसे में अगर किसी गैर पंजीकृत व्यापार से सामान खरीदा गया तो सामान खरीदने वाले व्यक्ति पर रिवर्स चार्ज की देनदारी बनेगी। यानी कि जीएसटी के बाद अब लोग गैर पंजीकृत व्यापारियों से खरीदारी करने से बचेंगे।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.