Maruti की वो अनसुनी कहानी जब सरकार कंपनी पर लगाने वाली थी ताला, फिर जाने क्या हुआ

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Maruti Sucess Story: मारुति सुज़ुकी देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। वहीं दुनियाभर में भी इसका नाम काफी सम्मान से लिया जाता है। दुनिया भर के 60 से ज्यादा देशों में मारुति सुजुकी की गाड़ियां एक्सपोर्ट होती है। इस कंपनी की पहली गाड़ी मारुति 800 की जोकि हैचबैक सेगमेंट में आती है।

मारुति सुज़ुकी हमेशा ही आम आदमी के लिए गाड़ियां बनाती रही है। मारुति 800 के निर्माण के बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक कारों को बनाते रहे कंपनी ने पहली बार मारुति 800 को 1983 में लांच किया था। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस कार की पहली कस्टमर थी। खुद हरपाल सिंह जी ने प्रधानमंत्री को चाबी सौंपी थी।

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बहुत से लोगों को नहीं पता होगा लेकिन 1983 में मारुति 800 के लॉन्च होने से तकरीबन 12 साल पहले ही कंपनी बनाई जा चुकी थी। लेकिन इन 12 साल के दौरान कंपनी ने एक भी कार्य का निर्माण नहीं किया था।

दरअसल इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने एक कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी खोलने का सपना देखा था और इसे ही पूरा करने के लिए उन्होंने कंपनी एक्ट के तहत मारुति लिमिटेड का गठन किया। 1971 में जब इस कंपनी को बनाया गया तो इसके पहले मैनेजिंग डायरेक्टर खुद संजय गांधी थे। संजय ने इस कंपनी को चलाने की खूब कोशिश की कई बार इसके डिजाइन और प्रोटोटाइप भी बनाए गए लेकिन वह सफल नहीं हो पाए।

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बाद में जाकर 1980 के विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने उनके सपने को बचाए रखने के लिए जापान की ऑटोमेकर कंपनी सुजुकी के साथ 1981 में करार किया। ऐसा करने के बाद इस कंपनी में एक अलग पहचान मिली और मारुति 800 का निर्माण हुआ। 2003 तक केंद्र सरकार का इस कंपनी में काफी बड़ा हिस्सा था। लेकिन इसी साल इस हिस्से को बेच दिया गया अब सरकार इस कंपनी में दखल नहीं देती है।

1983 से पहले हिंदुस्तान मोटर्स एम्बेसडर और कंटेसा कार ही नेताओं और बड़े लोगों के पास हुआ करती थी। आम लोगों के पास उस समय दुपहिया के नाम पर बजाज चेतक और बुलेट या राजदूत जैसी बाइक हुआ करती थी। लेकिन मारुति 800 ने आकर पूरा पासा ही पलट दिया। कम कीमत में आने वाली यह फोर व्हीलर उस समय आम आदमी की पहली पसंद बन गई और देखते ही देखते मारुति देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी बन गई।

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