Times Bull
News in Hindi

शिवलिंग क्या है, शिवलिंग पूजा के नियम जिनसे होते है भगवान शिव खुश

शिवलिंग को का प्रतीक माना जाता है तो जलाधारी को माता पार्वती का प्रतीक। निराकार रूप में को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है।

ॐ नम: शिवाय । यह भगवान का पंचाक्षरी मंत्र है।

इसका जप करते हुए शिवलिंग का पूजन या अभिषेक किया जाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र और शिवस्त्रोत का पाठ किया जाता है। शिवलिंग की पूजा का विधान बहुत ही विस्तृत है इसे किसी पुजारी के माध्यम से ही सम्पन्न किया जाता है।

शिवलिंग का अर्थ

शिवलिंग को नाद और बिंदु का प्रतीक माना जाता है। पुराणों में इसे ज्योर्तिबिंद कहा गया है। पुराणों में शिवलिंग को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है जैसे:–

प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, ऊर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्मांडीय स्तंभ लिंग आदि।

शिव का अर्थ ‘परम कल्याणकारी शुभ’ और ‘लिंग’ का अर्थ है- ‘सृजन ज्योति’। वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है।

शिवलिंग को पंचांमृत से स्नानादि कराकर उन पर भस्म से तीन आड़ी लकीरों वाला तिलक लगाएं।

शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए, लेकिन जलाधारी पर हल्दी चढ़ाई जा सकती है।

शिवलिंग पर दूध, जल, काले तिल चढ़ाने के बाद बेलपत्र चढ़ाएं।

केवड़ा तथा चम्पा के फूल न चढाएं। गुलाब और गेंदा किसी पुजारी से पूछकर ही चढ़ाएं।

कनेर, धतूरे, आक, चमेली, जूही के फूल चढ़ा सकते हैं।

शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाता, सामने रखा गया प्रसाद अवश्य ले सकते हैं।

शिवलिंग नहीं शिवमंदिर की आधी परिक्रमा ही की जाती है।

शिवलिंग के पूजन से पहले पार्वती का पूजन करना जरूरी है।

यह सूक्ष्म शरीर 17 तत्वों से बना होता है:–

1- मन,
2- बुद्धि,
3- पांच ज्ञानेन्द्रियां,
4- पांच कर्मेन्द्रियां और पांच वायु। भ्रकुटी के बीच स्थित हमारी आत्मा या कहें कि हम स्वयं भी इसी तरह है। बिंदु रूप।

रोचक और मजेदार खबरों के लिए अभी डाउनलोड करें Hindi News APP

Related posts

रोचक और मजेदार खबरों के लिए अभी डाउनलोड करें Hindi News APP

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Loading...