घर में ऐसे बनाएं पानी का स्थान, दूर होंगे कष्ट, बरसने लगेगी लक्ष्मी

Vastu tips for home in hindi

घर में वास्तु के कुछ बहुत ही आसान से नियमों का पालन कर समस्त समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ उपाय करने या लंबा-चौड़ा खर्चा करने की जरूरत नहीं है वरन छोटे-छोटे टिप्स को आजमा कर ही आप सुखी, समृद्ध गृहस्थी का सुख प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ वास्तु टिप्स के बारे में…

घर के बाहर बहुत निकट विशाल जल कुंड नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा करने से चर्मरोग एवं फेफड़े संबंधी रोगों से परिवार पीडि़त हो सकता है।
शयनकक्ष के सामने स्नानगृह होने से स्वास्थ्य पर विशेष रूप से पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में नगरों एवं बड़े कस्बों में भी शयनकक्ष में अटैच लेटबाथ का प्रचलन बढ़ गया है। यह वास्तुशास्त्र के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल है।
यदि घर में प्रवेश करते ही स्नानगृह हो तो घरवालों को बीमारियां घेर सकती है। स्नानगृह घर के मुख्य द्वार से दूर पूर्व दिशा में बनाना स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम होता है।
जल स्रोत दक्षिण पूर्व भाग में होने पर वहां के निवासियों को आंत, आमाशय, फेफड़े या उदर रोग की संभावना रहती है। ऐसी स्थिति से बचना चाहिए।
रसोई घर से सटे हुए स्थान पर कुआं है तो गृहणी के बीमार रहने की संभावना ज्यादा रहेगी। दक्षिण दिशा में भी नलकूप नहीं होना चाहिए।
आग्नेय कोण में खोदा गया कुआं गृहणी एवं संतान को अस्वस्थ बना सकता है।
नैऋत्य भाग नीचा, दक्षिण और नैऋत्य के बीच में या नैऋत्य और पश्चिम के बीच कुआं, गड्डे या नाली हो तो घर में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
यदि आपके समस्त उपायों के बावजूद भी घर में कोई वास्तु दोष है तो डरने की जरूरत नहीं है वरन इसके लिए वास्तु दोष शांति यज्ञ करना ठीक रहता है। अन्यथा आप वास्तु के नियमानुसार घर में शीशे (दर्पण), बांसुरी तथा रंगीन लाइट्स के प्रयोग से भी वास्तु दोष को पूरी तरह सही कर सकते हैं।

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