इस एक दिन के व्रत से मिलता है 10 हजार वर्षों की तपस्या का फल

पद्मपुराण के अनुसार श्रीकृष्ण कहते हैं कि लोक और परलोक में सौभाग्य प्रदान करने वाली वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से साधक को लाभ की प्राप्ति होती है तथा उसके पापों का नाश संभव हो जाता है। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को कठिन तपस्या करने के समान फल की प्राप्ति होती है।

इस व्रत के नियम अनुसार व्रत रखने वाले को दशमी तिथि के दिन से ही नियम धारण कर लेना चाहिए। संयम व शुद्ध आचरण का पालन करते हुए एकादशी के दिन प्रात: काल समस्त क्रियाओं से निवृत्त होकर भगवान विष्णु जी का पूजन करना चाहिए। विधिपूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत करते हुए एकादशी की रात्रि में जागरण तथा भजन कीर्तन करने चाहिए।

एकादशी का महत्त्व और फल
वरुथिनी एकादशी के बारे में ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का फल सभी एकादशियों से बढ़कर है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि अन्न दान और कन्या दान का महत्त्व हर दान से ज्यादा है और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने वाले को इन दोनों के योग के बराबर फल प्राप्त होता है। इस दिन जो पूर्ण उपवास रखते हैं, उन्हें 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल प्राप्त होता है और उसके सारे पाप धुल जाते हैं।

इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को भौतिक सुख तो प्राप्त होते ही हैं, मृत्यु के बाद उसे मोक्ष भी प्राप्त हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले सभी लोकों में श्रेष्ठ बैकुंठ लोक में जाते हैं। पुष्टिमार्गी वैष्णवों के लिए इस एकादशी का बहुत महत्त्व है। यह महाप्रभु वल्लभाचार्य की जयंती है। कहते हैं कि पापी सेे पापी व्यक्ति भी इस व्रत का पालन करे तो उसके मन से पाप का विचार धीरे-धीरे लोप हो जाता है और वह स्वर्ग का अधिकारी बन जाता है।

यह व्रत सुख सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन जरूरतमंद को दान देने से बहुत पुण्य मिलता है। करोड़ों वर्ष तक ध्यानमग्न होकर तपस्या करने से भी बढ़कर वरुथनी एकादशी व्रत का फल माना जाता है। हर वर्ग के जातक को वर्ष में एक बार इस व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए।

करें श्री हरी की पूजा
इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा विधि सहित करनी चाहिए। विष्णु सहस्त्रनाम का जाप एवं उनकी कथा का रसपान करना चाहिए। श्री विष्णु के निमित्त निर्जल रहकर व्रत का पालन करें। द्वादशी के दिन पूजन कर ब्राह्मण को भोजन कराएं। दक्षिणा देकर विदा करने बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें।

एकादशी के व्रत में सोना, पान खाना, दातुन, दूसरे की बुराई, चुगली, चोरी, हिंसा, काम क्रिया, क्रोध तथा झूठ का त्याग करें। इससे सुख का लाभ तथा पाप की हानि होती है। यह व्रत सभी भोग और मोक्ष प्रदान कराता है। वरुथिनी एकादशी व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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