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राजिम कुंभ मेला छत्तीसगढ़ के इतिहास में नया अध्याय

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि मेला प्रदेश के सांस्कृतिक इतिहास में एक नया कदम है। इस महत्वपूर्ण आयोजन से छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी है।

तीर्थ नगरी राजिम के महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर से तक विगत 13 वर्षों से आयोजित हो रहा है। बुधवार की देर रात राजिम कुंभ मेला (कल्प) का शुभारंभ हुआ।

इस मौके पर अग्रवाल ने कहा कि साधु-संतों, महात्माओं और महामंडलेश्वरों के पावन सान्निध्य में राजिम कुंभ मेले की शुरुआत हुई है। संत-महात्माओं के आशीर्वाद से राजिम कुंभ मेले की प्रतिष्ठा साल-दर साल बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ की समृद्धशाली संस्कृति में राजिम कुंभ की नई परंपरा भी जुड़ गई है।

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मेले में आए सभी साधु-संतों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘‘राजिम कुंभ मेला तेरहवें वर्ष में प्रवेश कर गया है। यह हम सबका सौभाग्य है कि शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और साधु-संतों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से राजिम कुंभ मेले का आयोजन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। मेले के दौरान संगम पर भव्य आरती की जाती है, इससे हरिद्वार और बनारस की गंगा आरती की यादें ताजा हो जाती हैं।’’

मंत्री ने कहा कि राजिम कुंभ मेले में इस साल दो नए आयाम जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता के नाम पर ढाई लाख दीए जलाए जाएंगे। उसके साथ ही एक साथ एक स्वर में 1500 शंख बजाए जाएंगे। यह अदभुत ²श्य होगा। उन्होंने कहा कि 3 फरवरी को नदियों को बचाने तथा संरक्षित करने मैराथन दौड़ भी होगी।

वहीं, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि राजिम कुंभ के आयोजन से छत्तीसगढ़ का गौरव हर साल बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि राजिम कुंभ में साधु-संतों का आशीर्वाद मिलता है।

मंच पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर, खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले, महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू और संसदीय सचिव तोखन साहू उपस्थित थे।

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