उत्पन्ना एकादशी व्रत के महात्म से होती है मोक्ष की प्राप्ति, जानें इसकी पूजन विधि

हिंदू धर्म में हर व्रत और त्यौहार का अपना अलग महत्व है। मार्गशीर्ष मास के कष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) कहा जाता है। इस बार उत्पन्ना एकादशी का व्रत 3 दिसंबर को पड़ रहा है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा—अर्चना की जाती है।

व्रत रखने वाले जातक की हो जाती है मोक्ष

शास्त्रों में कहा गया है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने वाले जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्रती को अश्वमेघ यज्ञों, कठिन तपस्या, तीर्थ स्नान व दान का फल भी प्राप्त होता है। इसलिए इस व्रत का अत्यधिक महत्व माना गया है। बता दें इस बार एकादशी तिथि 2 दिसंबर 2018 दोपहर 2 बजे से प्रारंभ हो जाएगी और 3 दिसंबर 2018 को 12:59 बजे समाप्त हो जाएगी।

जानें क्यों मनाई जाती है उत्पन्ना एकादशी

अगहन मास की कृष्ण एकादशी के दिन देवी का जन्म हुआ था। इन देवी का जन्म भगवान विष्णु से ही हुआ था। हालांकि इस बात का पता बहुत कम लोगों को है। इस वजह से इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसी दिन से एकादशी व्रत का आरंभ हुआ था।

उत्पन्ना एकादशी व्रत की पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानि दशमी तिथि से शुरू हो जाती है। उत्पन्ना एकादशी व्रत करने के लिए दशमी तिथि को शाम के समय भोजन करने के पश्चात रात्रि में भोजन न करें। इसके लिए रात्रि में व्रत उपवास करें। साथ ही इस एकादशी के दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। व्रती ध्यान रखें इस दिन वे ऐसा काम नहीं करें जिससे किसी आत्मा को ठेस पहुंचे।

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