Times Bull
News in Hindi

Maha Shivratri 2018: ऐसे करें महाशिवरात्रि का व्रत, पूजा, साथ ही इन महा शिवरात्रि उपायों से चमकेगी किस्मत

puja vidhi in hindi – पर्व शिव का सानिध्य प्राप्त करने का सबसे अच्छा एवं सरल संयोग है। इस दिन जो कोई भी सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है वह सभी कष्टों से मुक्त महादेव का आशीर्वाद पाता है। सर्व प्रथम मनुष्य को स्वच्छ जल से स्नानादि करके संकल्पित होकर व्रत को धारण करना चाहिए तथा शुद्ध मनोभाव से पूजन सामग्री एकत्रित करनी चाहिए।

कामना भेद के अनुसार अपने व्रत को गुप्त रखकर के दिशा आधार पर आसन संयोजित करना चाहिए। कामनानुसार पूजन सामग्री को एकत्रित कर समयानुसार नियमन करें। वैदिक पद्धति से की गई पूजा शीघ्र फलदायी मानी गई है। पौराणिक मान्यता से देखें तो अलग-अलग प्रकार से पूजन पद्धति इच्छित फल देने वाली और मनोकामना पूरी करने वाली होती है।

अविवाहित कन्याएं करें ये उपाय

जो कन्याएं विवाह योग्य हैं वे उत्तम वर के लिए महाशिवरात्रि का उपवास करें। संभव हो सके तो मौन व्रत रखकर शिव की आराधना करें। पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करें। पूजन के बाद भगवान शिव से याचक भाव से उत्तम वर की प्राप्ति तथा सफल वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करें।

अविवाहित पुरुषों के लिए उपाय

अविवाहित युवा एक समय फलाहार निश्चित करें तथा विधिवत भगवान शिव का अलग-अलग फलों के रसों से अष्टाध्यायी रूद्र का अभिषेक करें। पूजन के आखिर में इच्छित प्रार्थना करें। यह करने से मांगलिक विवाह के कार्य में आ रही बाधा दूर होगी तथा विवाह और मांगलिक कार्य आरंभ होगा।

यह करने से सभी को लाभ

1. पाठात्मक: घी का दीपक भगवान शिव के सामने रखकर यथा श्रद्धा शिवाष्टक, रूद्राष्टक, शिवमहिम्न स्तोत्र, महामृत्युंज स्तोत्र, शिव सहस्त्रनामावली आदि स्तोत्र का पाठ करने से भी शिव कृपा होती है।
2. अभिषेकात्मक: भगवान शिव का अनंत स्वरूप पूजन करने से भी शिव कृपा होती है। जिसमें पंचांमृताभिषेक, रसाभिषेक, धान्याभिषेक, आदि से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है।
3. हवानात्मक: महाशिव की कृपा पाने के लिए रूद्र के पूजन का हवानात्मक अनुष्ठान का उल्लेख शास्त्र में वर्णित है। यह करने से भी शिव कृपा होती है।

चार प्रहर की पूजा है विशेष फलदायी

– महाशिव रात्रि के पर्व पर भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा विशेष फलदायी होती है। ज्योतिषि पं. गिरधारी शर्मा ने बताया कि शाम को प्रदोषकाल से चार प्रहर की पूजा शुरू होती है और चार-चार घंटे के अंतराल में सम्पूर्ण रात्रि भगवान शिव की षोड्षोपचार पूजा की जाती है। इसमें जल, पंचामृत, बिल्वपत्र, आंक-धतूरा, चंदन, पुष्प आदि के साथ ही भगवान शिव का दुग्धाभिषेक और गंगाजल अभिषेक किया जाता है।

बिल्व पत्र, गाय का दूध शिव को प्रिय

maha shivratri puja vidhi in hindi – भगवान शिव की पूजा में बिल्व पत्र, गाय के दूध और गंगाजल की विशेष महत्वता है। ये तीनों ही शिव को अतिप्रिय हंै। क्योंकि मां पार्वती ने केवल बिल्व पत्र के सहारे शिवप्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी। इसलिए यह शिव प्रिय है।

इसी प्रकार गाय के दूध को पृथ्वी पर अमृत के समान माना गया है और गंगा को शिव ने अपनी जटा में धारण किया है। इस लिए ये तीनों ही भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं।

: भगवान भोलेनाथ महादेव की आराधना का महाशिवरात्रि पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार शिव साधक और वैष्णवजन एक ही दिन यह पर्व मनाएंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इस बार 13 फरवरी को त्रियोदशी तिथि को प्रदोष व्रत है और चतुर्दशी तिथि भी रात्रि में ही आ जाएगी। हिन्दूधर्म ग्रंथों में रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी को ही ( maha shivratri puja ) महाशिवरात्रि मनाए जाने का उल्लेख मिलता है। ज्योतिष मर्मज्ञ पं. केदारनाथ दाधीच ने व्रतराज ग्रंथ में नारद संहिता, निर्णय सिन्धु और धर्म सिन्धु आदि ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि जब त्रयोदशी सूर्यास्त के लगभग रहे और फिर चतुर्दशी तिथि आ जाए और वह पूरी रात्रि रहे, वह महा शिवरात्रि है।

इसी प्रकार कहा गया है कि ( ) महा शिवरात्रि व्रत अमान्तमान से माघ कृष्णा चतुर्दशी तथा पूर्णिमान्त मान से फाल्गुन कृष्णा चतुर्दशी के दिन होता है। इसे अर्धरात्रव्यापिनी चतुर्दशी में करना चाहिए। नारद संहिता में कहा गया है कि जिस दिन माघ (फाल्गुन) कृष्णा चतुर्दशी आधी रात के साथ योग रखती हो उस दिन जो शिवरात्रि का व्रत करता है। वह अनन्त फल को पाता है। ज्योतिषि पं. कल्याण नारायण ने बताया कि इस बार चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात्रि में ही आ जाएगी जो कि 14 फरवरी को 12: 47 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए 13 फरवरी को रात्रिव्यापिनी चतुर्दशी में ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।

Related posts

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.