भगवान शंकर को प्रिय है प्रदोष व्रत, देता है यश, वैभव और सम्पन्नता

प्रदोष व्रत पूर्व  तिथि के संयोग से मनाया जाता है। यानी द्वादशी तिथि से संयुक्त त्रयोदशी तिथि को यह व्रत आचरित किया जाता है। पक्ष भेद होने के कारण इसे शुक्ल या कृष्ण प्रदोष व्रत कहा जाता है। भगवान शिव को यह व्रत परम प्रिय है इसलिये इस व्रत में शिवजी की उपासना की जाती है। पुराणों के अनुसार प्रदोष व्रत करने से सांसारिक दुखों से निवृत्ति मिलती है। यह व्रत सुख संपदा युक्त जीवन शैली के अलावा हमें यश, कीर्ति, ख्याति, वैभव और सम्पन्नता देने में समर्थ होता है
व्रत है कल्याणकारी


यह व्रत उपवासक को धर्म, मोक्ष से जोडऩे वाला और अर्थ, काम के बंधनों से मुक्त करने वाला होता है। भगवान शिव की आराधना करने वाले जातकों को गरीबी, मृत्यु, दुख और ऋणों से मुक्ति मिलती है। सोमवार के दिन त्रयोदशी पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य देता है तो सोमवार के त्रयोदशी प्रदोष व्रत से मनोइच्छा की पूर्ति होती है।


जिस मास में मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो, उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है, वहीं बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो उपासक की सभी कामना की पूर्ति होने की संभावना बनती है। गुरु प्रदोष व्रत शत्रुओं के विनाश के लिए किया जाता है। शुक्रवार के दिन होने वाल प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है। आखिर में जिन्हें संतान प्राप्ति की कामना हो, उन्हें शनिवार के दिन पडऩे वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए।


जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं महादेव


अपनी सामथ्र्य के अनुसार पूजन सामग्री, विल्वपत्रादि लाकर संभव हो सके तो पति-पत्नी एक साथ बैठकर शिवजी का पूजन करें। यदि कोई मंत्र नहीं आते हों तो ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए पूजा करें। महादेव जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं।


प्रदोष व्रत रखने से सांसारिक दुखों की भी निवृत्ति होती है। यह व्रत सुख संपदा युक्त जीवन शैली के अलावा हमें यश, कीति, ख्याति और वैभव देने में समर्थ होता है। विशेष रूप से श्रावण भाद्रपद, कार्तिक और माघ मास में पडऩे वाले प्रदोष व्रत आज के दैहिक-भौतिक कष्टों का निवारण करने में परम सहायक होता है।

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