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एक मुसलमान ने खोजी थी बर्फानी बाबा की गुफा, फिर हुआ चमत्कार

हर साल देशभर से कई भक्त तमाम मुश्किलें सहते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा को जाते हैं। हालांकि अमरनाथ गुफा का इतिहास बेहद रोचक है। इस गुफा के बारे में ऐसी बहुत सी बाते हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं। यहां पढ़ें उनके बारे में।

ऐसा है रास्ता

अमरनाथ यात्रा बेहद मुश्किल यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह गुफा दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालयवर्ती क्षेत्र में है। यह राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से लगभग 141 किमी क दूरी पर स्थित है। समुद्र से यहां की ऊंचाई से 3,888 मीटर (12,756 फुट) है। यहां पहलगाम और बालटाल के जरिए पहुंचए जहा सकता है।

यह है मान्यता

ऐसा माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में एक गडेरिये, बूटा मलिक ने इस गुफा की खोज की थी। बूटा वहां बकरियां चराने गया था, तो वहां उसे एक साधु मिले और उसने अंगीठी जलाने के लिए कायेला दिया। घर पहुंचकर जब बूटा ने उस थैले को सोने के सिक्कों से भरा पाया, तो उसे आश्चर्य हुआ। वो महात्मा का धन्यवाद करना चाहता था, लेकिन वह साधु उसे उस जगह नहीं मिला। इसकी जगह बूटा ने पवित्र गुफा देखी और उसे वहां शिवलिंग के दर्शन हुए।

उसने इलाके के लोगों को जब इस बारे में बताया तो वहां लोगों तीर्थ के लिए जाने लगे। धीरे धीरे यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बन गया। यह भी मान्यता है कि काफी समय पहले कश्मीर घाटी जलमग्न हो गई थी। इसके बाद कश्यप मुनि ने अनेक नदियों और नालों के जरिए इसका पानी निकाला। इस प्रकार जब पानी उतरा, तो उन्होंने भगवान अमरनाथ के सबसे पहले दर्शन किए।

जब लोगों ने शिवलिंग के बारे में सुना तो यह आस्था रखने वाले लोगों के लिए भगवान भोले नाथ का स्थान बन गया। इसके बाद से लाखों लोग हर साल यहां यात्रा करते हैं। कहते हैं यहां मांगी हर मुराद पूरी होती है।