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chandra grahan 2018 : आज चन्द्रग्रहण पर बना राजयोग, इन उपायों को करने से बन जाएगी बिगड़ी किस्मत

पूर्णिमा शुभ तिथि सायं 6.57 तक है। इसके बाद फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा प्रारम्भ हो जाएगी। पूर्णिमा तिथि में विवाहादि मांगलिक कार्य, देवकार्य, मंदिर, प्रतिष्ठा, याज्ञिक, शान्ति व पौष्टिक आदि कार्य शुभ कहे गए हैं। अभी शुक्रास्त के कारण विवाहादि मांगलिक कार्य वर्जित हैं। नक्षत्र: पुष्य ‘क्षिप्र व ऊध्र्वमुख’ संज्ञक नक्षत्र सायं 5.36 तक, तदन्तर अश्लेषा ‘तीक्ष्ण व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र में सभी चर स्थिर, शांति, पुष्टता तथा अन्य उत्सव सम्बंधी कार्य करने योग्य हैं।

अश्लेषा गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अत: अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातकों की 27 दिन बाद जब इसी नक्षत्र की पुनरावृत्ति हो उस दिन नक्षत्र शांति करा देना जातकों के हित में होगा। योग: आयुष्मान नामक योग रात्रि 2.26 तक, इसके बाद सौभाग्य नामक योग है। दोनों ही नैसर्गिक शुभ योग है। विशिष्ट योग: राजयोग नामक शुभ योग सूर्योदय से सायं 5.36 तक है। करण: भद्रा संज्ञक विष्टि नामकरण प्रात: 8.40 तक, तदुपरान्त बवादि करण प्रारम्भ हो जाएंगे।

Super Blue Blood Moon Lunar Eclipse
Super Blue Blood Moon Lunar Eclipse

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से प्रात: 9.59 तक लाभ व अमृत, पूर्वाह्न 11.29 से दोपहर 12.40 तक शुभ तथा अपराह्न 3.25 से सूर्यस्त तक चर व लाभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं, जो आवश्यक शुभकार्यारंभ के लिए अत्युत्तम हैं। बुधवार को अभिजित नामक मुहूर्त शुभ कार्यों में ग्राह्य नहीं हैं। शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज पुष्य नक्षत्र में भद्रोत्तर, अन्नप्राशन, हलप्रवहण और विपणि-व्यापारारम्भ के यथा आवश्यक शुभ मुहूर्त हैं।

व्रतोत्सव: आज माघी पूर्णिमा, सत्य पूर्णिमा व्रत, गुरु रविदास जयंती, माघ स्नान समाप्त, होलिका रोपण, भैरवी जयंती, मुख्य मेला वेणेश्वर डूंगरपुर (राज.) तथा खग्रास चद्र ग्रहण (भारत में दृश्य)। ग्रहण का सूतक: सूतक प्रात: सूर्य उदय के साथ ही प्रारंभ हो जाएगा। इसमें (बच्चों, वृद्ध व रोगियों को छोडक़र) धार्मिक जनों को भोजनादि नहीं करना चाहिए। चन्द्रमा: चन्द्रमा कर्क राशि में है। ग्रह राशि नक्षत्र परिवर्तन: अंतरात्रि 4.25 पर शुक्र धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। दिशाशूल: उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। राहुकाल: दोपहर 12.00 से दोपहर बाद 1.30 बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

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