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क्रोधी और महत्वाकांक्षी होते हैं मेष लग्न वाले, जानिए उपाय

मेष लग्न के जातक देखने में दुबले-पतले अर्थात् ना अधिक मोटे और ना ही अधिक पतले, लेकिन अन्दर से मजबूत एवं कठोर होते हैं। मेष लग्न चर लग्न है अर्थात् चलायमान। ये एक जगह टिककर नहीं बैठ सकते हैं निरन्तर क्रियाशील रहना इनके स्वभाव में होता है। लग्न के स्वामी मंगल होने की वजह से सेनापति की भांति अनुशासनप्रिय होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य में बैठे रहना पसंद नहीं होता है।
ये एक साथ कई कार्य शुरू करते हैं। इन्हें प्रतीक्षा करना पसंद नहीं होता है इसलिए तुरन्त परिणाम न आने पर काम को बीच में ही छो़डने की प्रवृत्ति रखते हैं और अपने इसी स्वभाव के कारण कोई भी कार्य पूरा नहीं कर पाते हैं। मेष लग्न अग्नि तत्त्व लग्न है इसलिए आपको तेज मसालेदार खाना पसंद होता है।

तेज मसालेदार भोजन करने की वजह से आपको पित्त संबंधी समस्याएँ अधिक रहती है। आपको अपने खान-पान में कम मसाले वाला भोजन उपयोग करना चाहिए और पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए। मसाले वाला तीखा भोजन करने की वजह से आपको पेट संबंधी समस्या भी रहती है।

अग्नि तत्त्व होने से आपको क्रोध बहुत अधिक आता है लेकिन जितनी शीघ्रता से क्रोध आता है उतनी शीघ्रता से उतर भी जाता है। आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए अन्यथा व्यर्थ में ही आपके विरोधी बनते चले जायेंगे। मेष लग्न का चिह्न मेढ़ा होता है जिस प्रकार मेढ़ा बिना सोचे-समझे अपने शत्रु पर वार करता है उसी प्रकार मेष लग्न वाले जातक भी बिना सोचे, बिना सामने वाले की शक्ति का आंकलन किये कार्य करते हैं। अपने संबंधों में मधुरता बनाये रखने के लिए आपको अपनी वाणी एवं व्यवहार में विनम्रता लानी चाहिए।

आपको अपने स्वभाव में धैर्य धारण करना चाहिए। आप अत्यधिक महत्वकांक्षी होते हैं। अपनी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आप लगातार मेहनत करते हैं। आपको योजना बनाना पसंद होता है, नेतृत्व करना पसंद होता है लेकिन किसी के निर्देशन में कार्य करना पसंद नहीं होता है। मेष लग्न के जातक दिल के साफ होते हैं तथा जो भी कहना होता है उसे सामने ही बोल देते हैं।

मेष लग्न वालों की रूचि :-

रुचि: मेष लग्न वालों को शब्द पहेलियों को खेलना अच्छा लगता है। इन्हें टेलीफोन पर बातचीत करना पसन्द अधिक पसन्द होता है। ऎसा व्यक्ति पत्रलेखन में रुचि रखता है। इस लग्न के लोग जल्द घुलमिल जाते है। इन्हें हंसी मजाक करना पसन्द होता है। इस लग्न के व्यक्ति पत्रकारिता व प्रकाशन के क्षेत्र में जाना पसन्द करते है। इन्हें घूमना फिरना पसन्द होता है। इसलिये पर्यटन अदि में भी रुचि लेते है।

व्यवसाय: मेष लग्न वालों के लिये आजीविका के क्षेत्र उनकी रुचियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार है। ये लोग अच्छे संवाददाता बन सकते है। इनमें व्याख्या करने की योग्यता होती है। इस लग्न के व्यक्ति लेखक, कार चालक, दूरदर्शन या रेडियों के कलाकार, उदघोषक, अनेक भाषाओं का जानकार तथा विक्रय सहायक बनाता है। इस लग्न के व्यक्ति विमान चालक भी बन सकते है

आर्थिक समस्या निवारण हेतु :-

यदि आपकी आय के मार्ग अवरूद्ध होंने लगें अथवा आपका किसी को दिया हुआ पैसा वापिस नहीं मिल पा रहा हो, तो उसके लिए निरन्तर शनिवार के दिन पीपल के 21 अखंडित पत्तों की माला बनाकर श्री हनुमान जी को अर्पित करें एवं इस कालावधि में नित्य संध्या समय श्री हनुमानाष्टक का पाठ करें। आप देखेंगें कि इस उपाय से जहाँ आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं यदि किसी के पास आपका धन उधार फंस गया है तो अल्प प्रत्यनों से उसकी प्राप्ति भी होने लगेगी।

भाग्योन्नति हेतु :-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए आपको गाय के कच्चे दूध में केसर घिसकर उसका तिलक अपने ललाट एवं नाभि के समीप लगाना चाहिए। साथ ही न्यूनतम 16 बृहस्पतिवार केसरयुक्त चावल कन्यायों अथवा गायों को खिलाना चाहिए।
साथ ही जीवन कल्याणार्थ श्री पीताम्बरा श्रीकवच धारण करना अथवा प्रतिदिन सोने और उठने के समय श्री रामावतार महिमा का पाठ/श्रवण किया करें।
आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध मिटने लगे हैं तथा जीवन में सुख एवं शान्ति का समावेश होने लगा है।

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु :-

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं कार्यों में व्यवधान उत्पन हो रहे हों, तो आपको प्रत्येक मंगलवार के दिन श्री हनुमान जी के मन्दिर में जाकर गुड एवं चने का प्रसाद चढाना चाहिए तथा उस प्रसाद को वहीं मन्दिर में ही बाँट देना चाहिए। साथ ही नित्य प्रात: काल में निम्न मन्त्र का जाप अवश्य किया करें।

ॐ आदिदेव नमस्तुभ्यं सप्तसप्ते दिवाकर !
त्वं रवे तारय स्वास्मानस्मात्संसार सागरात !!

उपरोक्त उपाय के विधिवत निष्पादन से जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से आपको सहज ही मुक्ति मिलने लगेगी।

सम्पत्ति, वाहन सुख हेतु :-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए सर्वप्रथम दाहिने हाथ की तर्जनी अगुंली में स्वर्ण धातु का एक छल्ला धारण करें एवं तत्पश्चात रात्रि को सवा पाव ( लगभग 300 ग्राम) कच्चा दूध सिरहाने अथवा अपने पलंग के नीचे रखकर सोईये तथा अगले दिन उस दूध को किसी नदी/तालाब/कुँए इत्यादि में विसर्जित कर दें। ऎसा न्यूनतम 7 सोमवार निरन्तर करें तो आपकी समस्या का समाधान स्वत: ही निकलने लगेगा।

दाम्पत्य सुख हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आप प्रतिदिन (न्यूनतम 40 दिन) सुगन्धित केवडा मिश्रित जल से भगवान सदाशिव का अभिषेक करें । स्थायी फल प्राप्ति हेतु जीवन में एक बार अपने हाथों किसी उचित स्थान पर 5 फलदार वृक्ष के पौधे अवश्य रौपें ।

भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु :-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए अपने घर में लाल रंग के पुष्प उत्पन्न करने वाले पौधे लगायें तथा प्रतिदिन प्रात:काल अपने सिर को लाल वस्त्र से ढककर कुशा, रौली मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

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