5 काम जो पूर्णिमा तथा अमावस्या को नहीं करने चाहिए

सहवास न करेंयूं तो सहवास पारिवारिक जीवन का अभिन्न अंग है परन्तु नवरात्रि में पूजा-अर्चना करने वालों के लिए सहवाग के लिए स्पष्ट मना किया गया है। यह समय हमारे शरीर के लिए ऊर्जा एकत्रित करने का सर्वश्रेष्ठ समय है जिसे हम सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।


माता-पिता, वृद्धजनों तथा गुरुजनों का अपमान न करेंनवरात्रि में अपने माता-पिता, वृद्धजनों तथा गुरुजनों का मान-सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने से उनका आशीर्वाद तो प्राप्त होता ही है साथ में भगवान भी प्रसन्न होकर समस्त कष्टों का निवारण करते हैं।


घर आए साधु, भिखारी या भूखे को खाली हाथ न जाने देंहिंदू धर्म में परोपकार को विशेष महत्व दिया गया है। इस समय किए गए पुण्य का अन्य दिनों की अपेक्षा हजार गुणा फल मिलता है। अधिक से अधिक यही प्रयास करना चाहिए कि इस समय घर आए साधु-सन्यासी, भिखारी या किसी भूखे को खाली हाथ न जाने दें, हो सके तो उन्हें भोजन करवाकर कुछ दक्षिणा दें। इससे आपके ऊपर आने वाला बड़े से बड़ा संकट भी टल जाएगा।


घर में क्लेश न करेंवैसे तो घर में शांति और सुकून का होना ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है परन्तु नवरात्र जैसे विशेष अवसरों पर शांति का वातावरण घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वरदान लेकर आता है।


घर में गंदगी न रखेंनवरात्रि में भगवान को भोग लगाया जाता है अतः जरूरी है कि इस समय घर में साफ-सफाई रखी जाए और पवित्र वातावरण बनाए रखा जाए ताकि पूजा का वास्तविक फायदा हो सकें।

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