बचपन से ही ज्योतिष में थी रूचि, आज ऐसे संवार रहे दूसरों का जीवन

बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपनी हॉबी को ही अपना कॅरियर बना कर उसे चरम ऊंचाईयों पर ले जाते हैं। आचार्य अनुपम जौली भी एक ऐसा ही उदाहरण है। बचपन से ही प्राचीन भारतीय ज्ञान में रूचि रखने वाले अनुपम जौली शुरूआत में कम्प्यूटर साइंस में अपना कॅरियर बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने 12वीं कक्षा पास करने के बाद कम्प्यूटर साइंस में बीसीए भी किया। 90 के दशक में जब भारत कम्प्यूटर से परिचित ही हो रहा था, उन्होंने इसे ही अपना कॅरियर चुना और स्वयं का व्यापार आरंभ किया।

बिजनेस में घाटा होने के बाद बनाया ज्योतिष को कॅरियर

जल्दी ही उनका बिजनेस अच्छा चलने लगा परन्तु किन्हीं कारणों से उन्हें इसे बंद करना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने कई और बिजनेस शुरू किए लेकिन सभी में नाकामी हाथ लगी। अनुपम जौली बचपन से ही ज्योतिष तथा वास्तु में प्रवीण थे। ज्योतिष में उनकी इसी रूचि को देखते हुए उनके गुरू ने उन्हें ज्योतिष में ही भाग्य आजमाने के लिए कहा। शुरूआत में अनुपम घर पर ही कुंडलियां देखने लगे। धीरे-धीरे वह अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

शौकिया तौर पर की थी शुरूआत

जिस उम्र में बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं, उस उम्र से ही अनुपम हाथों की रेखाओं तथा ग्रह-नक्षत्रों की गणनाओं में उलझे रहते थे। अपने खाली समय में वो अपने दोस्तों तथा पड़ौसियों का भाग्य देखने का कार्य करते थे। धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया और उन्होंने ठान लिया कि ज्योतिष को पूरी तरह सिखना है।

आज विदेशी भी आते हैं ज्योतिष सीखने

विदेशियों में प्राचीन भारतीय विद्याओं के प्रति बढ़ती रूचि के चलते ज्योतिष भी इन दिनों काफी रूझान में है। आज आचार्य अनुपम जौली अपने स्वयं का एस्ट्रोलजी एंड डिवाइन साइंसेज के नाम से ज्योतिष शिक्षण संस्थान भी चलाते हैं। इस संस्थान में वो विदेशियों को ज्योतिष, वास्तु तथा रमल का ज्ञान देते हैं। आचार्य अनुपम जौली के पास इन दिनों ज्योतिष, वास्तु तथा रमल सीखने के लिए विदेशों से काफी स्टूडेंट्स आते हैं। उन्हें देश-विदेश में ज्योतिष पर हो रहे सेमिनारों में बोलने के लिए भी बुलाया जाता है। यही नहीं मैत्रेय नाम से भी वो एक एनजीओ चलाते हैं जिसके जरिए आर्थिक रूप से अक्षम बच्चों को शिक्षा के लिए मदद दी जाती है।