रेप के डर से संबंध बनाने का खुलासा करने वाली इस प्लेयर ने बताई सीक्रेट बातें

भारतीय महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ी रेप के डर से आपस में संबंध बना लेती थीं। इसके बाद उनका अफेयर भी शुरू हो जाता। यह सनसनीखेज खुलासा भारतीय महिला फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान सोना चौधरी ने की। उनके खुलासे हैरान करने वाले हैं। सोना चौधरी ने अपनी किताब गेम इन गेम में खिलाडिय़ों के साथ बदसलूकी की 90 फीसदी सच्ची घटनाएं लिखने का दावा किया है। उनका कहना है कि टीम के कोच व सचिव महिला फुटबॉल खिलाडिय़ों को कई चीजों के लिए समझौता करने पर मजबूर करते थे। किताब में उन्होंने खुलासा किया है कि कोच द्वारा शोषण से बचने के लिए खिलाड़ी आपस में संबंध में बना लेती थीं। सोना के अनुसार राज्य की टीम हो फिर राष्ट्रीय टीम हो या भारतीय टीम, कई लड़कियों को कई स्तर पर समझौता करने के लिए मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाता है।

अपनी बुक में अपने पहले अनुभव के बारे में बताते हुए सोना लिखती हैं कि कई साल पहले हमारी टीम खेलने के लिए पड़ोसी राज्य में हुई थी। मेरा यह पहला अनुभव था बाहर जाने का। जिस गेस्ट हाउस में हमें ठहराया गया था, वहां हमारी टीम को दो कमरे मिले थे। वहीं पर साथ में हमारे सर यानी टीम मैनेजर भी ठहरे थे। पहली शाम, सभी महिला खिलाड़ी अंदर मौजूद थी कि अचानक से सर ने एक दीदी को इशारे से बुलाया। वो साथ में किसी को चलने को कह रही थी कि सर ने कहा, अकेले ही आओ।

सोना ने बताया कि सर के बुलाने पर जैसे ही दीदी गई, मुझे अजीब सी जिज्ञासा हुई कि ऐसा क्या है कि सर ने दीदी को इतनी जल्दी में बुलाया। मुझे चलकर देखना चाहिए। मैं दूसरे कमरे में जहां सर का बेड था वहां देखने चली गई, वे मुझे वहां भी नहीं मिली। मैं परेशान होकर उन्हें इधर-उधर ढूंढऩे लगी। गेस्ट हाउस का बगीचा पार करते ही पेड़ों के बीच से एक पेड़ से दीदी की कमर लगी थी और सर उन पर जबरदस्ती झुकने की कोशिश करते हुए बड़बड़ा रहे थे। सर कह रहे थे कि मैं कितनी बार कह चुका हूं कि मुझे ……………., पता नहीं इतनी सी बात तुम्हारी समझ में क्यूं नहीं आती। अरे इंडियन टीम में सेलेक्शन मेरे ही कहने से होना है। फिर जो मैं कह रहा हूं, उसमें बुराई ही क्या है। दीदी रोआंसी सी होकर चुपचाप वहां से निकलने की कोशिश में थी।

रियाणा में खिलाडिय़ों के साथ होने वाली राजनीति से परेशान होकर सोना चौधरी 1995 में उत्तरप्रदेश में आकर बस गईं। 1995 में ही भारतीय महिला फुटबॉल टीम में खेलने का मौका मिला और इसके बाद वे महज एक साल बाद वे भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान बन गईं। उन्होंने 1996-97 तक कप्तानी संभाली। सोना चौधरी ने हरियाणा पुलिस की काफी प्रशंसा की है। उन्होंने बताया है कि हरियाणा पुलिस ने मुझे काफी समर्थन किया है और वे अपना ग्राउंड खेलने के लिए देते थे। सोना चौधरी मूलत: हरियाणा की रहनेवाली हैं। 1994 में कॅरियर शुरू करने वालीं सोना हरियाणा की बेस्ट प्लेयर थीं।

सोना को फुटबॉल से प्यार 1989 में स्कूलिंग के दौरान हुआ था। वो राइट बैक पोजिशन से खेलती थीं। 1998 में एशियन गेम्स के दौरान उन्हें घुटने और रीड़ की हड्डी में चोट लगी थी। उस चोट ने उनका फुटबॉल कॅरियर खत्म कर दिया था। ऑपरेशन के बाद सोना 6 महीने तक बिस्तर पर ही रहीं। फुटबॉल के अलावा सोना ने एथलेटिक्स में भी हिस्सा लिया। 2002 में शादी के बाद वह वाराणसी आकर बस गईं। यहीं से उन्होंने 1995 में भारतीय महिला फुटबॉल टीम में एंट्री की। वह एक शानदार खिलाड़ी थी जिन्होंने अपने काबिलियत के बूते टीम की कप्तानी हासिल की थी। उन्होंने 1996-97 तक कप्तानी संभाली। वो राइट बैक पोजिशन से खेलती थीं। साल 1998 में खेले गए एशियन गेम्स के दौरान उन्हें घुटने और पीठ में चोट लगी थी। इसी चोट की वजह से उनका कॅरियर खत्म हो गया। 2002 में सोना ने एक एयरफोर्स अधिकारी से शादी कर ली। अब वह वाराणसी में रहती हैं।

एक इंटरव्यू में सोना से जब यह पूछा गया कि क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ कि आप पर समझौता करने के लिए दवाब बनाया गया हो। इसके जवाब में सोना ने कहा कि मैं इस बात का जवाब नहीं देना चाहती। फिर जब उनसे ये पूछा गया कि क्या कभी आपके किसी साथी के साथ ऐसा हुआ तो सोना चौधरी का जवाब हां में था। उन्होंने कहा कि हुआ है पर हम तब साहस नहीं जुटा पाए थे। हममें उस वक्त उतनी समझ नहीं थी। आप मां-बाप से बात नहीं कर सकते क्योंकि आपको पता है कि आपका स्पोट्र्सं खत्म हो जाएगा। आपका कॅरियर खत्म हो जाएगा। आपका बाहर जाना ही बंद हो जाएगा। सोना ने कहा कि ऐसी आवाज उठाने के लिए आपको गट्स चाहिए होता है।

यह पूछे जाने पर कि कौन कोच ऐसे थे जो ऐसे काम किया करते थे, सोना चौधरी ने नाम बताने से इंकार कर दिया। हालांकि यह जरूर कहा कि कुछ ऐसे स्टेट्स थे जिन्होंने इसकी शुरुआत की थी। उनकी ही वजह से यह सिस्टम खराब हुआ। मैंने उस वक्त यह सब महसूस हुआ पर इसे उठाने में मुझे 20 साल लगे। तब से लेकर आज तक ये सवाल मुझे परेशान करता रहा। मुझे अगर पब्लिसिटी चाहिए होती तो मैंने जब इंडियन टीम छोड़ा था, तभी यह सब उठाती। मेरी सिस्टम से लड़ाई है।

हिंदुस्तान मौका दे तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूं। लेेकिन मेरी राजनीति में आने और कोच बनने की कोई इच्छा नहीं है। लेकिन मुझे सिस्टम बदलना है। मैं तब तक लड़ूंगी, जब तक यह सिस्टम ठीक नहीं हो जाता। इसके लिए मैं जल्द ही खेल मंत्री से भी मिलकर बात करूंगी। सोना कहती हैं कि हम दिखने वाली चोटों का तो डॉक्टर से ट्रीटमेंट करा लेते हैं पर खिलाडिय़ों को जो मानसिक चोट लगती है वह सारी जिंदगी ठीक नहीं होती है। एक खिलाड़ी होने के नाते इस बात को मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता।

महिला खिलाडिय़ों के आपस में लेस्बियन रिश्ता बना लेने के खुलासे पर सोना चौधरी ने कहा कि बच्चे बगैर कम्यूनिकेशन के आपस में एक-दूसरे से रिश्ता बना लेते हैं क्योंकि यह उन्हें सेफ माध्यम लगता है। यह एक सच है। मैं इसे नकार नहीं रही हूं। यह एक बड़ा फैक्ट है। मैं इसे 100 प्रतिशत दावे के साथ कह सकती हूं पर इसे गलत रूप में परोसा जा रहा है। पूर्व कप्तान ने कहा कि एसोसिएशन-फेडरेशन बंद हो जाने चाहिए। एक क्लीन और क्लीयर सिस्टम होना चाहिए। कोच की भी रेटिंग होनी चाहिए। एक साल में आपने कितने रिजल्ट दिए हैं। इसका फीडबैक फॉर्म होना चाहिए। कोच जिसे चाहता है, बनाता है। जिसका चाहता है, कॅरियर बर्बाद भी कर देता है। हमारे यहां अर्जुन-बहुत है, एकलव्य बहुत है। गुरु कम हैं।

सोना चौधरी खुद एक अच्छी लेखिका रहीं हैं और उन्हें लेखन के लिए जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पिछले साल सम्मानित भी कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने दो उपन्यास लिखे थे। उनका पहला उपन्यास वी चित्र प्रकाशित हुआ। इसके बाद उन्होंने पायदान नामक उपन्यास लिखा था। पायदान उपन्यास बाद में अंग्रेजी में रूपांतरित हुआ, जिसका नाम था शो स्टेप। इन दोनों ही उपन्यासों में उन्होंने स्त्री का शोषण किस तरह किया जाता है, इसका बेबाकी से चित्रण किया है। सोना ने भारतीय महिला फुटबॉल टीम मैनेजमेंट, कोच और सचिव द्वारा टीम की महिला खिलाडिय़ों के उत्पीडऩ को लेकर यह खुलासे किए हैं। सोना ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अपनी किताब गेम इन गेम लांच की है। इस पुस्तक का विमोचन पिछले दिनों ख्यात पाकिस्तानी गायक गुलाम अली ने किया था।

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