बिटकॉइन क्या है (What is Bitcoin in Hindi) और कैसे काम करता है?

बिटकॉइन! बिटकॉइन! बिटकॉइन! आप भी पिछले काफी दिनों से हर जगह बस यही सुन रहे होंगें। हो सकता है इसे लेकर आपके मन में बहुत सारे सवाल भी होंगे और, आपके इन्ही सारे सवाल के जवाब देने लिए ये आर्टिकल “बिटकॉइन क्या है (What is Bitcoin in Hindi) तथा बिटकॉइन काम कैसे करता है” लिखा गया है।

इस आर्टिकल में मैं आपको स्टेप-बाय-स्टेप तरीके से बताऊंगा कि बिटकॉइन क्या है, बिटकॉइन का इतिहास क्या है, तथा इसे बनाने की जरुरत ही क्यों पड़ी तथा और भी कई इंटरेस्टिंग बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे।

बिटकॉइन क्या है (What is bitcoin in Hindi):
बिटकॉइन को शार्ट फॉर्म में btc भी कहा जाता है दुनिया की सबसे पहली क्रिप्टोकरेंसी है। चूंकि, क्रिप्टोकरेंसी decentralized होती है अतः बिटकॉइन दुनिया की पहली decentralize यानि कि जिस पर किसी भी सरकार, agency या किसी भी कंपनी का कोई भी कंट्रोल नहीं होता, वो करेंसी है।

बिटकॉइन decentralized इसलिए है क्योंकि यह peer-to-peer transaction technique पर काम करता है और इसमें होने वाले प्रत्येक transaction सीधे-सीधे दो लोगों के बीच ही होते हैं। कोई भी third party जैसे बैंक या कोई other agency इनके बीच में नही होती है। और सीधी सी बात है जब कोई third party बीच में है ही नही तो वो इसकी monitoring या कंट्रोल नहीं कर पायेगी।

बिटकॉइन केवल इन्टरनेट वर्ल्ड में ही चलने वाली करेंसी है, वास्तविक रूप में बिटकॉइन (बिटकॉइन) का physical shape नहीं होता है। आप इसे ना छू सकते हैं, ना ही पकड़ सकते हैं यहाँ तक कि, आप इसे देख भी नहीं सकते हैं।

बिटकॉइन सिर्फ कोड के रूप में होती है अन्य क्रिप्टोकरेंसी की तरह। इन्टरनेट पर भी इसका कोई आकार (size) या colour नही होता है, यह सिर्फ कोड का एक set होता है जो कुछ इस तरह से दिखता है; 9fdj:9eft7:2ml3:23nl:rsw9:038f और इसे ही हम बिटकॉइन बोलते हैं।

सबसे ऊपर आपको image में जो coin दिखाई दे रहा है वह भी भी काल्पनिक (imazinery) symbol है। इसकी एक और खास बात है कि यह fully encrypted होती है।

जिस तरह से, हमारे रूपये के सबसे smallest part को “पैंसा” कहा जाता है ठीक उसी तरह, बिटकॉइन के सबसे छोटे part को “सतोशी (satoshi) कहते हैं।

बिटकॉइन के बारे में एक और interesting बात जो इसे हमारी करेंसी से अलग और secure बनाती है वो ये है कि पूरी दुनियाभर में कुल कितने बिटकॉइन होंगे इसको उसी time decide कर दिया गया था जब पहली बार बिटकॉइन का अविष्कार हुआ था।

दुनिया में कुल 2 करोड़ 10 लाख बिटकॉइन ही बनने हैं जिसमे से कि लगभग 1 करोड़ 8 लाख बिटकॉइन बन चुके हैं। यही कारण है कि आज बिटकॉइन प्राइस बहुत बढ़ चुके हैं, क्योंकि अब ये कुछ limited संख्या में ही बचे हुए हैं जबकि future में इन्ही का दौर चलने वाला है।

ये तो, ये तो था कि बिटकॉइन क्या है (What is bitcoin in Hindi) उम्मीद है आपको ये समझ आया हो और अब बात कर लेते हैं कि बिटकॉइन का इतिहास क्या है? ये बना कैसे और बनाने की जरुरत पड़ी ही क्यों?

बिटकॉइन का इतिहास:

बिटकॉइन को पहली बार 3 जनवरी 2009 में लांच किया गया था और इसका अविष्कारक किया था “सतोशी नाकामोटो” नाम के एक computer programmer ने। हालाँकि, माना जाता है कि सतोशी नाकामोटो को कभी किसी ने भी देखा नहीं है और इसी बात का फायदा उठाते हुए दुनिया भर में अलग-अलग लोगों ने खुद के सतोशी नाकामोटो होने का दावा किया है।

लेकिन, इसके ठीक उल्टा, कुछ experts का ये भी मानना है कि बिटकॉइन को जिस advance technology का उपयोग करके बनाया गया है ये किसी अकेले व्यक्ति के बस का काम नही है, इसके पीछे कोई बड़ी team हो सकती है।

बिटकॉइन क्या है (What is बिटकॉइन in Hindi) के इस आर्टिकल में अब बात करते हैं कि बिटकॉइन को बनाने की जरुरत ही क्यों पड़ी।

आप बहुत बार सुनते होंगे की share market down होने से काफी पैसा डूब जाता है, या कई देशों में shut down जैसी घटनाओं से से बहुत बड़ी echonomical desaster (आर्थिक आपदा) पैदा जाती है, अभी हाल ही में दिसम्बर 2016 में भारत में नोटबंदी के रूप में हुए नोटबंदी से भी कुछ लोगों को भारी नुकसान हुआ था, इन्ही सारी चीजों के effect से बचते हुए अपने पैसों को safe रखने और transaction को private रखने के लिए क्रिप्टोकरेंसी की जरुरत पड़ी जो कि सबसे पहले बिटकॉइन के रूप में सामने आई।

चूँकि, जब तक हमारी करेंसी हमारी सरकार या सरकारी एजेंसी के under में रहती हैं तो सरकार या उन एजेंसी में होने वाले हर उतार-चढाव या बदलाव के साथ हमारी करेंसी पर भी असर पड़ता है और फायदा या नुकसान भी उसी के हिसाब से होता है।

लेकिन, जब करेंसी किसी भी बैंक या सरकार के under में ना हो कर decentralized रहेगी तो फिर उपर बताई किसी भी problems का उस पर कोई असर नहीं होगा। और बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को इसी उद्देश्य के लिए develop किया गया था ताकि, सरकार के कंट्रोल के बाहर रहकर भी लेन-देन safe तरीके से लेन-देन किया जा सके।

बिटकॉइन काम कैसे करता है?

अभी तक तो हमने बात की बिटकॉइन क्या है और जाना कि बिटकॉइन का इतिहास क्या है, अब मैं आपको बताता हूँ यह काम कैसे करता है। actually में, बिटकॉइन को बनाने के लिए जिस advance technology का उपयोग किया गया है उसका नाम है blockchain technology.

इस टेक्नोलॉजी की खासियत ये है कि इसमें कोई भी चीज एक जगह store नहीं रहती है और ना ही इसमें कोई server काम करता है।

इसमें कोई भी digital content एक जगह पर ना होकर बहुत सारे छोटे-छोटे blocks में अलग-अलग जगह पर store रहता है। यही कारण है कि इसे ना कोई monitor कर सकता है, ना कंट्रोल कर सकता है और ना ही इसमें किसी भी प्रकार की हेरा-फेरी कर सकता है।

अगर हम केवल बिटकॉइन की बात करें तो इसका कोड भी किसी एक computer में ना होकर कई सारे parts में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग computer या अन्य मशीन में store रहता है और इसका उपयोग करने के लिए उन सभी जगहों से computers को request भेजकर इसे integrate (एकीकरण) करना होता है तभी ये successfully transfer हो पाता है।

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