राहु महादशा और शनि की साढ़ेसाती में क्या उपाय करने चाहिये?

राहु महादशा और शनि की साढ़ेसाती में क्या उपाय करने चाहिये?

राहू

राहू मूलतः छाया ग्रह है, फिर भी उसे एक पूर्ण ग्रह के समान ही माना जाता है। यह आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है।राहु की दृष्टि कुंडली के पंचम, सप्तम और नवम भाव पर पड़ती है। जिन भावों पर राहु की दृष्टि का प्रभाव पड़ता है, वे राहु की महादशा में अवश्य प्रभावित होते हैं।
राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है। राहु में राहु की अंतर्दशा का काल 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है। इस अवधि में राहु से प्रभावित जातक को अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। विष और जल के कारण पीड़ा हो सकती है। विषाक्त भोजन, से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त अपच, सर्पदंश, परस्त्री या पर पुरुष गमन की आशंका भी इस अवधि में बनी रहती है। अशुभ राहु की इस अवधि में जातक के किसी प्रिय से वियोग, समाज में अपयश, निंदा आदि की संभावना भी रहती है। किसी दुष्ट व्यक्ति के कारण उस परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

उपाय:

भगवान शिव के रौद्र अवतार भगवान भैरव के मंदिर में रविवार को तेल का दीपक जलाएं।
शराब का सेवन कतई न करें।
लावारिस शव के दाह-संस्कार के लिए शमशान में लकड़िया दान करें।
अप्रिय वचनों का प्रयोग न करें।

शनि

शनि को शांत करना उतना आसान भी नही। न्याय के देवता शनि अपना असर दिखाएंगे। न्याय के देवता कर्म के अनुसार ही दंड देने वाले बताए जाते हैं, किंतु कुछ ऐसे भी उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप साढ़े साती और अढैया में भी उनके शुभ दृष्टि के पात्र बन सकते हैं। यहां हम आपको शनि की कुदृष्टि से बचने और उन्हें प्रसन्न करने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं…

1. सबसे पहले तो हर शनिवार को शनि देव की पूजा प्रारंभ करें और उन्हें नियमानुसार तिल और तेल चढ़ाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उपाय सर्वाधिक सरल और उत्तम बताया गया है।

2. इन्हें अत्यधिक क्रूर देवता भी माना जाता है, दंड देने वे किसी भी तरह का दया भाव नही दिखाते। शनि की साढ़े साती या महादशा चल रही है तो शनिवार को शुद्ध तेल का दान करें।

3. शनिदेव को उनके दस नामों के साथ जाप करके भी प्रसन्न किया जा सकता है। यह दस नाम हैं। कोणस्थ,पिंगल,बभ्रु,कृष्ण,रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर,मंद व पिप्पलाद।

4. पीपल के पेड़ में विष्णु का वास माना गया है। अतः हर शनिवार को पीपल के पेड़ की जड़ों में जल अर्पित करें एवं शाम के समय दीपक जलाएं।

5. शनिदेव को नीले-काले रंग का फूल चढ़ाएं। ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। यह आपके मन को भी शांति प्रदान करेगा।

6. काले चने चढ़ाना भी उर्पयुक्त उपाय बताया गया है। इसके अलावा आप सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं।

7. समुद्री नाव की कील या काले घोड़े की नाल से लोहे की अंगूठी बनवाकर उसे मध्यमा अंगुली में धारण करें। इससे पहले उसे तिल के तेल में रखकर शनि मंत्र का जाप करें।

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