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ये 92 साल की बुजुर्ग रोजाना खाती है एक किलो रेत

उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर के कजरी नूरपुर में रहने वाली 92 साल की सुदामा देवी को गर्भावस्था के दौरान रेत खाने की जो लत लगी वो आज तक नहीं छूटी।

सुदामा देवी ने पहली बार रेत तब खाया जब वह 10 साल की थीं, उस समय उन्होंने अपनी सहेली के साथ रेत खाने की शर्त लगाई थी। सुदामा देवी कहती हैं जब वह बच्ची थीं तब उन्हें रेत खाना अच्छा लगता था। धीरे-धीरे यह दिनचर्या आहार में बदल गया।

आज वह दिन में तीन से चार बार एक किलो रेत खा लेती हैं। जब सुदामा 13 साल की हुईं तब उनका विवाह कृष्ण कुमार से हुआ जिनसे उन्हें दस बच्चे हुए। इनमें से शुरुआती पांच की प्रसव के दौरान ही मौत हो गई। फिलहाल उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं। पूरा परिवार मजदूरी से गुजर बसर करता है।

परिजन ही खिलाते हैं रेत

वैसे परिवार में कोई भी सदस्य सुदामा देवी की तरह रेत नहीं खाता लेकिन उनके लिए रेत की व्यवस्था जरूर कर देता है। सुदामा देवी की माने तो शादी से पहले पिता और भाई उनके लिए रेत की व्यवस्था कर देते थे।

वहीं शादी के बाद यही काम उनके लिए पति करने लगे। इतना ही नहीं पहले वह घटिया घाट की गंगा से रेत भरकर ले आती थीं। बाद में गांव के लोग भी उनके लिए उपहार में रेत लाने लगे।

खाने में रेत

सुदामा देवी बताती हैं कि उनकी एक संतान गर्भ में थी, तभी अचानक घर की भट्टी में दहक रही रेत को खाने का मन हुआ। शुरूआत आधा किलो से हुई, जो आज एक-डेढ़ किलो तक पहुंच गई है। वह बताती हैं कि रेत न मिलने पर कुछ खाने का मन ही नहीं होता।

 वैसे सुदामा रेत खाने के साथ ही भोजन में तीन मोटी-मोटी रोटियां भी लेती हैं। उन्हें कभी भी पेट दर्द अथवा किसी बीमारी को लेकर डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ा। बताया जाता है कि रेत का स्वाद उनको दाल-चावल जैसा स्वादिष्ट लगता है।

स्थानीय नागरिक के अनुसार सुदामा देवी शारीरिक रूप से पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी जांच करने वाले डॉक्टर का मानना है कि इस उम्र में भी सुदामा देवी का सेहत बहुत ही अच्छा है। वह किसी भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं है।

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