दलित परिवार को श्मशान घाट नहीं जाने दिया

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के धारा गांव में अंतिम संस्कार के लिए एक सार्वजनिक श्मशान घाट तक दलित परिवार को जाने से रोकने की शिकायत पर प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रविवार को संज्ञान लिया।राज्यपाल ने कुल्लू प्रशासन से कहा कि इस मामले में उचित कार्रवाई करें। 

श्री रविदास धर्म सभा के अध्यक्ष करम चंद भैटिया के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की और घटना से उन्हें अवगत कराया। इसके बाद राज्यपाल ने उचित कार्रवाई का आदेश दिया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार की बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करने लोग नदी को पार कर पहुंचे थे, लेकिन उच्च जाति के लोगों ने उन्हें गांव के श्मशान घाट का उपयोग नहीं करने दिया। यह गांव कुल्लू जिले के पाटलीकुहल पुलिस थाने के तहत आता है। 

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में यह कोई नई बात नहीं है। शताब्दियों से आ रही जाति आधारित व्यवस्था के तहत दलित और पिछड़े समुदाय के लोगों को सार्वजनिक स्थलों, मंदिरों, जल स्थलों पर जाने से रोका जाता रहा है। 

स्कूल की गतिविधियों में भी निचली जाति के छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है। यहां तक कि मिड डे मील में भी भेदभाव बरता जाता है, क्योंकि 15 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में रसोइये आमतौर पर उच्च जाति के हैं। 

राज्य के लिए यह दुखद है कि 82.8 फीसदी साक्षरता दर होने के बाद भी यह भेदभाव जारी है। 2011 की जनगणना के अनुसार दलितों की आबादी करीब एक-चौथाई यानी करीब 68 लाख है। 

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