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चीन ने ही नहीं दुनिया में इन सरहदों पर खड़ी की गई है दीवारें, जानिए

इंसान जब धरती पर आया तो उसने अपने लिए सरहदें खींच दीं। कहीं सुरक्षा के नाम पर तो कहीं प्रवासियों को रोकने के नाम पर और कहीं नफरत के नाम पर। ये दीवारें उतनी कारगर साबित नहीं हो सकीं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए पहले फेज में 1.14 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी देने से ये फिर चर्चा में हैं।

सुरक्षा में कितनी कारगर हैं ये दीवारें

दीवारें एक तरह से राजनीतिक एजेंडा होती हैं। इतिहास गवाह है कि दीवारों ने दूरियां ही बनाई हैं। सुरक्षा के नाम पर भले ही बनाई जाती हों, मगर हकीकत यह है कि तकनीकी युग में ऐसी दीवारें बेमानी हैं। मौजूदा वक्तमें दुश्मन को दीवार भेदने की जरूरत नहीं होती है। अपनी सरहद में रहकर ही दुश्मन हमला बोल सकता है। साइबर खतरे इसका बड़ा उदाहरण हैं।

मैक्सिको की सीमा पर दीवार क्यों?

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैक्सिको से लगी सीमा पर दीवार बनाना चाहते हैं, ताकि अवैध प्रवासियों को रोका जा सके। इसके लिए उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के वक्त लोगों से वादा भी किया था कि सत्ता में आते ही इस दीवार के निर्माण पर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा। दीवार का निर्माण होने पर यह दुनिया की सबसे बड़ी निर्माण योजना होगी। 20 फीट ऊंची और 8 इंच मोटी इस दीवार को बनाने में 34 करोड़ टन कंक्रीट का इस्तेमाल होगा। इसके बनने में करीब चार साल लगेंगे। अमरीका-मैक्सिको की सीमा 3,200 किमी लंबी है।

बर्लिन की दीवार क्यों बनी थी?

नाजी जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ खत्म हुए दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी शीतयुद्ध के भंवर में फंस गया। इसके बाद बर्लिन की दीवार बनाई गई। यह दीवार पश्चिमी बर्लिन और जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच एक अवरोध थी, जिसने 28 साल तक बर्लिन शहर को पूर्वी और पश्चिमी टुकड़ों में बांट रखा था। इसका निर्माण 13 अगस्त 1961 को शुरू हुआ और 9 नवंबर, 1989 के बाद के सप्ताहों में इसे तोड़ दिया गया। बर्लिन की दीवार अंदरूनी जर्मन सीमा का सबसे प्रमुख भाग थी और शीत युद्ध का प्रमुख प्रतीक थी।

उत्तर और दक्षिण कोरिया में क्या?

1910 से लेकर 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप जापान के कब्जे में रहा। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतिम दिनों में रूस और अमरीका का निशाना जर्मनी के साथ धुरी बनाने वाला जापान था और कोरिया जंग का मैदान था। युद्ध के बाद सोवियत रूस ने कोरिया के उत्तरी भाग को कब्जे में ले लिया, जबकि दक्षिणी हिस्सा अमरीका के कब्जे में चला गया। 1948 में दक्षिण कोरिया में अमरीका समर्थित व उत्तर कोरिया में चीन-रूस समर्थित सरकार बनी। उत्तर कोरिया ने तानाशाही जबकि दक्षिण कोरिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाई। 1953 में दोनों देशों के बीच 250 किमी लंबी और 4 किमी चौड़ी असैन्य क्षेत्र बनाया गया।

भारत-पाक सीमा पर भी लेजर दीवार

भारत और पाकिस्तान के बीच करीब 2900 किलोमीटर लंबी सीमा है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अनुसार मार्च, 2018 तक भारत-पाक सीमा के बीच स्मार्ट दीवार का काम पूरा कर लिया जाएगा। यह स्मार्ट दीवार पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। यह दीवार सीमा पर होने वाली किसी भी घुसपैठ का पता लगाने में पूरी तरह से सक्षम होगी। इस दीवार को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि यह पाकिस्तान की ओर से होने वाली आतंकियों की घुसपैठ में कमी ला सकेगी। यह दीवार लेजर फेंस, सैटेलाइट इमेजिनरी और थर्मल गैजेट्स से लैस होगी।

किसलिए बनाई गई चीन की बड़ी दीवार?

8851.8 किमी लंबी दुनिया की सबसे बड़ी दीवार जिसे ग्रेट वॉल ऑफ चाइना भी कहते हैं। यह अपनी बेजोड़ लंबाई की वजह से तो यह दुनिया भर में प्रसिद्ध है ही लेकिन इसके अलावा भी इस दीवार से जुड़ी बहुत सारी दिलचस्प कहानियां चीन में खूूूब प्रचलित हैं। यहां पर बड़ी संख्या में निर्मित दुर्गम दर्रें भी बेमिसाल है। यूनेस्को की वल्र्ड हेरिटेज साइट में शुमार इस ग्रेट वॉल को देखने के लिए हर साल बहुत बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। इस किलेनुमा दीवार को 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 16वीं शताब्दी तक चीन के अलग-अलग शासकों ने बनवाया था। इसे बनवाने के पीछे का मकसद उत्तरी हमलावरों से अपनी रक्षा
करना था।

इजरायल और फलस्तीन के बीच भी दीवार

इजरायल ने गाजा पट्टी से लाल सागर तक करीब 200 किमी की दूरी पर छह मीटर ऊंची दीवार बनाई है। यह दीवार सीमेंट की है, बल्कि इसके चारो ओर कंटीले तारों से घेराबंदी भी की गई है। इसमें कई तरह के सेंसर्स भी लगे हैं और जैसे ही कोई जानवर या फिर इंसान दीवार को छूने की कोशिश करता है, सेंसर्स इजरायली सैनिकों को अलर्ट भेज देते हैं।

दीवारों से सख्त सीमा रेखा

मैकमोहन : भारत-चीन
रेडक्लिफ : भारत-पाक
हिंडनबर्ग : जर्मनी-पोलैंड
मैगीनाट : फ्रांस-जर्मनी
17 वीं समानांतर : उत्तरी व द. वियतनाम के बीच

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